अंतरिक्ष में अपना स्वयं का नेवीगेशन प्रणाली स्थापित करने वाला भारत अब दुनिया का तीसरा राष्ट्र बन गया. अभी तक केवल अमेरिका और रूस के पास ही उनके ऐसे सिस्टम हैं.

अंतरिक्ष के विकास में भारत के सामने जब भी अन्य देशों की तरफ से ऐसी चुनौती आयी उसका जवाब इसरो ने हमेशा अपने एक और ऐसी सफलता से दिया कि अड़ंगा डालने व चुनौती देने वाले राष्ट्रों को मुंह की खानी पड़ी और अपने कार्य पर लज्जित भी हुए.

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में लांचिंग प्रणाली को उन्नत करने के लिए भारत को क्रायोजनिक एंजिनों की जरूरत महसूस की. अमेरिका के नासा ने इसकी तकनीक को बनाया. क्रायोजनिक एंजिन देने से इंकार कर दिया. भारत ने रूस से इसका करार कर लिया. लेकिन अमेरिका ने ऐसा दबाव बनाया कि रूस ने भी हमें क्रायोजनिक एंजिन देने से इंकार कर दिया. इसके अगले ही पांच सालों में इसरो ने भारत में ही पूरी तरह स्वदेशी क्रायोजनिक एंजिन विकसित कर लिया. अमेरिका को मुंह की खानी पड़ी और रूस को भी इस बात का बड़ा पश्चाताप हुआ कि वह अमेरिका के दबाव में मित्र राष्ट्र भारत को क्रायोजनिक देने से मुकर गया था.

लाहौर में हुई प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी व पाकिस्तान के प्रधानमंत्री श्री नवाज शरीफ के बीच नये सौहार्द को खत्म करने के लिए वहां के सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ ने भारत पर कारगिल क्षेत्र में हमला कर दिया. इस समय भारत ने अमेरिका से यह अपेक्षा की थी कि वह अपने अंतरिक्ष नेवीगेशन सिस्टम से हमें पाकिस्तानी सैनिकों की पोजीशन बता दे, लेकिन उसने मना कर दिया. तभी इसरो ने फिर एक चुनौती के रूप में इसे लिया और उसके वैज्ञानिक इस पर 17 साल जुटे रहे और अब स्वयं का नेवीगेशन सिस्टम जिसे ‘नाविकÓ नाम दिया गया है, बना लिया. क्रायोजनिक के बाद इसे नेवीगेशन सिस्टम की चुनौती दी गयी और 28 अप्रैल को भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक ऊंची उड़ान भर कर इंडियन रीजनल नेवीगेशनल सेटेलाइट सिस्टम (आई.आर.एन.एस.एस.) का आखिरी व 7वां उपग्रह अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया और यह मिशन पूरा हो गया. इसके अग्रिम पहले ही स्थापित किये जा चुके हैं. इस सातवें सेटेलाइट से भारत का अंतरिक्ष नेवीगेशन सिस्टम पूर्ण हो गया. इस 1420 करोड़ रुपये लागत के नाविक को 20 मिनिट की उड़ान में इसरो के वैज्ञानिकों ने इस पी.एस.एल.पी.- सी.33 ने 14.25 किलोग्राम के उपग्रह को पृथ्वी से 493.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित कर दिया.

अब भारत को अमेरिका सिस्टम से कभी मदद मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसकी स्थापना के साथ ही हमने अपना स्वाभिमान व ज्ञान… दोनों को भी स्थापित कर लिया.

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इसे ‘नाविकÓ नाम देते हुए भारत की गरिमा में यह कहा कि अब हमारे रास्ते हम खुद तय करेंगे और अपने सार्क सहयोगी देशों को भी यह सुविधा दे देंगे. यह भारत का अमेरिकी अहंकार को जवाब है कि उसने तो हमें मना कर दिया है लेकिन हम अपने सार्क सहयोगियों को इसकी सेवा देंगे. सार्क देशों में पाकिस्तान भी शामिल है जिसने कारगिल पर हमला किया था.

भारत इस उपलब्धि में अपनी नेवीगेशन पोजीशनिंग, जियोसेकिंग…, प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी स्थानीय मोबाइल की लोकेशन, जहाज, हवाईजहाज, बस, रेल के बारे में उनका लोकेशन बता देगा. सबसे बड़ी बात सुरक्षा में यह होगी इससे भारत की तीनों जल, थल, नभ सेनाओं को सीमा की निगरानी में मजबूत आधार मिलेगा और दुश्मन की लोकेशन हमारी निगाहों में रहेगी.

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