मध्यप्रदेश को बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती मनाने का जन्मजात अधिकार है क्योंकि बाबा साहब का जन्म महू नगर की सैनिक छावनी में हुआ था. जहां उनके पिता श्री रामजी सेना की सर्विस में थे.

इस साल उनकी 127वीं जयंती महू में इसलिए विशेष रही कि पहली बार भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द वहां पहुंचे थेे. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने ही संविधान के रूप व स्वरूप में संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमेन की हैसियत से बहुत बड़ा योगदान दिया है.

भारत के राष्ट्रपति पर यह संविधानिक दायित्व होता है कि वह संविधान की रक्षा करेंगे. अब तक भारत में 12 राष्ट्रपति पहले हो चुके है और श्री कोविन्द 13वें राष्ट्रपति है और संविधान निर्माता बाबा साहब को महू आकर नमन करने वाले पहले राष्ट्रपति है.

संविधान में सबसे पहले पृष्ठ पर संविधान के निर्देशात्मक सिद्धांत दिये गये है. जिन्हें राष्ट्र को करना होगा. उनमें एक समान नागरिक संहिता बनाने का भी है. बाबा साहब को सही श्रद्धांजलि इस प्रकार से दी जानी चाहिए कि देश में जल्द से जल्द समान नागरिक संहिता बना दी जाए.

जाति प्रथा को जड़ से ऐसा खत्म किया जाए कि इस तरह के जघन्य अपराध न हों कि दलित वर्ग का दूल्हा घोड़े पर बारात नहीं निकाल सकता, उन सडक़ों या मोहल्ले से बारात नहीं निकाल सकता जो सवर्णों के मोहल्ले हैं. या घोड़ा नहीं खरीद सकता, उस पर बैठ नहीं सकता.

दलित उत्पीडऩ अभी भी समाज में बहुत व्याप्त है और इसका एकमात्र निदान है कि देश से जाति प्रथा समाप्त कर एक भारतीय समाज बनाया जाए और उसका आधार समान नागरिक संहिता ही हो सकता है.