ujjainउज्जैन,  दूसरे शाही स्नान में श्रद्धा की पराकाष्ठा ने सिंहस्थ को अद्भुत बना दिया. श्रद्धा के सैलाब ने आमजन को ही नहीं पुलिस-प्रशासन तक को अचंभित कर दिया. करीब 75 लाख श्रद्धालुओं ने सभी साधु-संतो के सानिध्य में मां शिप्रा में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया.

महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि तीन दिन पूर्व की भांति प्रकृति आज भी रूठी,करीब आधे घंटे तक बारिश, ओलावृिष्ट हुई, पुलिस-प्रशासन की स्नान व्यवस्थाओं से लोग दु:खी होने पर भी सिंहस्थ में मां शिप्रा के प्रति श्रद्धा की पराकाष्ठा ने सब पर विजय प्राप्त कर ली. सनातन संस्कृति के इस अनूठे महापर्व को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह पिछले दो दिनो से चरम पर था. शनिवार से ही लोगो का बढ़ी संख्या में आना शुरू हो गया था जो सोमवार रात्रि तक लगातार जारी रहा.

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जैसे ही अखाड़ो के साधु समाज का स्नान पूरा हुआ वैसे ही आमजन रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट की और दौड़ पड़े. अन्य घाटों पर स्नान की व्यवस्था थी लेकिन हर किसी की इच्छा इन दोनों घाटो पर स्नान की रही.

धर्म आध्यात्म और आस्था के संगम की प्रत्यक्ष अनुभूति करने को बेताब लोगो का उत्साह देखते ही बन रहा था.

रामघाट पर स्नान व्यवस्था को लेकर आम श्रद्धालु काफी दु:खी नजर आया. पुलिस-प्रशासन ने अखाड़ों को केन्द्र में रखकर अधिक सोचा और उसी अनुरूप व्यवस्था जमाई. आम श्रद्धालु के प्रति गंभीर नजरिया नहीं दिखाई देने से उन्हें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ा. पुलिस-प्रशासन के बीच समन्वय का अभाव होने से आम लोगो को अधिक परेशानी हुई. बावजूद इसके शाही स्नान के अद्भुत दृश्यों को चिरस्थाई बनाएं रखने के लिये सभी श्रद्धालु लालायित थे.

शाही स्नान में सर्वप्रथम जूना अखाड़ा के साधु-संतों व नागा सन्यासियों नेे परपंरागत रूप से भूत भावन भगवान महाकाल और मां शिप्रा के नाम का जयघोष करने के साथ डुबकी लगाई. अमृत पाने की चाहत में साधु समाज के साथ ही किसी ने भी कोई कमी नहीं रखी.

पहले शाही स्नान की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक रही. प्रशासन ने 24 घंटे में करीब 75 लाख श्रद्धालुओं के दूसरे शाही में शामिल होने का आंकलन किया है. प्रभारी मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने सिंहस्थ के दूसरे शाही स्नान के सफलतापूर्वक व निर्विघ्र सम्पन्न होने पर सभी का आभार व्यक्त करते हुए श्रद्धालुओं की श्रद्धा को प्रणाम किया है. उन्होंने इसके लिये मुख्यमंत्री शिवराजसिंह की इस बात पर सरहना की कि उन्होंने हर घड़ी में श्रद्धालुओं व साधु संतो के बीच पहुंचकर उनका विश्वास जीतने व आशीर्वाद प्राप्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

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