13as2भोपाल,  समान कार्य समान वेतन की मांगों समेत अपनी लंबित मांगों को स्थानीय नीलम पार्क में आजाद अध्यापक संघ के तत्वावधान में आयोजित धरने पर बैठे प्रदेश भर के अध्यापकों ने रविवार से अपना आंदोलन तेज कर दिया.
अध्यापकों ने आज रैली निकालकर प्रदर्शन करना चाहा लेकिन प्रशासन की अनुमति नही मिलने से अध्यापकों ने फिर शाहजहांनी पार्क में सभा कर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रदर्शन कर विरोध जताया.

अध्यापकों के धरने के कारण आज लीलीटाकीज चौराहे से लेकर यादगारे शाहजहांनी पार्क, काली मंदिर भारत टॉकीज, सहित पुराने शहर की कई सड़कों पर ट्रैफिक जाम घंटो जाम लगा रहा. आंदोलन कर रहे संघ के पदाधिकारियों भरत पटेल, जावेद खान बताया कि सरकार ने मांगें पूरी करने का वादा किया था,वह अपने वादे से मुकर गई. पदाधिकारी द्वय का कहना था कि यदि मांगें नहीं मानी गई तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे.

साथ ही स्कूलों में तालाबंदी कर आंदोलन और उग्र करेंगे. शाहजहांनी पार्क में सभा में वक्ताओं का कहना था कि राज्य सरकार ने समान वेतनमान देने के लिए जो आदेश जारी हुआ उसमे शिक्षक संवर्ग ओर अध्यापक संवर्ग के वेतन अंतर को किश्तों मे अन्तरिम राहत देकर बराबर करने का आदेश हुआ . चार किश्तों मे मिलने वाली अन्तरिम राहत की अंतिम किश्त सितंबर 2016 मे मिलेगी ओर वेतन निर्धारण 2017 मे किया जाएगा .शिक्षा विभाग सिर्फ अधिकारियों अफसरों ओर बाबुओ का विभाग बनने की ओर अग्रसर हो गया . बाद मे एक ओर चमत्कारिक पद का सृजन किया गया – संविदा शिक्षक’ .

शब्द से ही ठेकेदारी ओर शिक्षक के बंधुआ होने का अहसास होता है . अगर संविदा शिक्षक के साथ होने वाली संविदा का प्रारूप देखे तो निश्चित ही किसी बंधुआ मजदूर से भी गयी बीती स्थिति मिलेगी . ऊपर से इन शिक्षको की भर्ती , पदोन्नति ,नियमितीकरण के समस्त अधिकार भी पंचायत राज संस्थाओ ओर स्थानीय निकायो को सौप दिये गए . ओर संविदा काल मे वेतन किसी अकुशल मजदूर के लिए घोषित न्यूनतम दरों से आज भी कम है . इस तरह बड़ी चालाकी से सरकारो ने शिक्षको को ना केवल शिक्षा विभाग से दूर कर दिया अपितु उनसे शासकीय कर्मचारी होने का हक भी छीन लिया .

इन शिक्षकर्मियों ओर संविदा शिक्षको को ना केवल अपने मूल विभाग से वंचित किया गया अपितु उन तमाम सुविधाओ ओर अधिकारों से भी वंचित किया गया जो एक शासकीय कर्मचारी होने के नाते उनका हक था . वेतन भत्तो मे तो भेदभाव किया ही गया बीमा , पेंशन ,स्थानांतरण जैसी मौलिक सुविधाओं से आज तक वंचित रखा गया है . स्वयं के विध्यालय मे शिक्षाकर्मियों को एक दोयम दर्जे का स्थान प्रदान कर , शिक्षक-शिक्षक मे भेद कर एक अंतहीन वर्ग संघर्ष को जन्म दे दिया गया जिसने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की जड़े खोखली कर दी गई . नियमित शिक्षक संवर्गों ओर शिक्षाकर्मी संवर्गों मेें भेदभाव की ये शोषणरक नीतियां आज भी जारी है.

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