25nn10भोपाल, 25 अगस्त. नभासं. छात्र निशांत को अपहरणकर्ताओं ने किडनेप करने के बाद भोपाल में ही रखा था, इसकी पुलिसकर्मियों में खूब चर्चा है. वे भी अंदर ही अंदर इस बात को स्वीकार रहें हैं कि अपहरणकर्ता निशांत को कहीं नहीं ले गए. दस दिनों तक निशांत को अपहरण कर रखा, लेकिन जब मामले ने तूल पकड़ा, तो उनके हाथ पांव फूल गए और बच्चे को गैरतगंज के पास छोड़ आए.

अपहरणकर्ताओं ने बड़ी चालकी से एमपी नगर के पास पैन ड्रायव छोड़ा जिसमें वीडियो के माध्यम से निशांत से यह कहलवाया कि अंकल बहुत डांटते हैं, अगर काम नहीं किया तो अंजाम भुगतना पड़ेगा? क्या अपहरणकर्ता नौसिखिये थे, या फिर उन्हें इस बात का आभास था कि वीडियो पहुंच जाने के बाद निशांत के पिता दीपक झोंपे टूट जाएंगे और वे मांगी रकम की फिरौती उनके बताए स्थान पर पहुंचा देंगे. निशांत का मामला हाईप्रोफाइल हो गया था.

जोर शोर से मीडिया ने उसे उठाया, उसका परिणाम यह हुआ कि राजधानी की पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच, जीआरपी व अन्य जिलों की पुलिस निशांत की तलाश में जुट गई थी. निशांत झोंपे के बेेटे निशांत का अपहरण उस समय किया गया था, जब वह स्कूल जा रहा था. निशांत की खोज में परिजन, रिश्तेदारों के अलावा साकेत नगर में रहने वाले लोग भी लग गए थे. सभी ने अपने अपने स्तर पर उसे ढंूढऩे का प्रयास किया. तीन दिन बाद फिरौती की मांग के बाद यह पक्का हो जाता है कि उसका अपहरण किया गया है.

अपहरणकर्ताओं को इस बात की जानकारी थी, कि उसकी पिता का कारोबार अच्छा चल रहा है, वे इस बात को लेकर भी आश्वस्त थे कि फिरौती की रकम का इंतजाम कुछ भी करें कैसे भी करें, निशांत के पिता व्यवस्था करेंगे. शायद इन्हीं सब बातों को लेकर अपहरण की वारदात को अंजाम दिया गया था.

एक बात अब भी सोचने को मजबूर कर रही है, वह यह कि निशांत ने बताया कि खाना मांगने पर वे मारपीट नहीं करते थे, बल्कि डांटते थे. सुबह, दोपहर व सांय के समय बराबर खाना मिलता था. अगर बदमाशों द्वारा इस वारदात को अंजाम दिया गया होता तो क्या वे ऐसा व्यवहार करते? कहीं यह तो नहीं कि इस घटनाक्रम में कोई परिचित ही शामिल रहा हो, जिसका उद्देश्य केवल मात्र रुपए मांगना हो.

Related Posts: