अफगानिस्तान की संसद पर तालिबानी हमला 22 जून की सुबह लगभग 12 बजे उस समय हुआ, जब संसद की कार्यवाही चल रही थी. पहले संसद के आहते में एक कार में आत्मघाती विस्फोट हुआ और उसी क्रम में 9 और बस धमाके व गोली बारी शुरू हो गयी. संसद के निचले सदन में भी विस्फोट व गोलीबारी हुई. संसद के बाहर लगभग 9 लोग मारे गये और 18 घायल हुए. सदन के अंदर कुछ सांसदों को चोटें आयीं लेकिन सभी सांसद या दीर्घा पत्रकार सुरक्षित बाहर निकाल लिये गये. सरकार ने कहा है कि हालत काबू में है और सभी सांसद सुरक्षित है. हमला होते ही सुरक्षा कर्मियों ने मोर्चा सम्हाल लिया और मुठभेड़ शुरू हो गयी. धमाकों के बाद पांच बंदूकधारी संसद में प्रवेश कर गये थे और उन्होंने अंदर भी गोली बारी की. संसद पर पहले भी 2008-09 और 12 में हमले हो चुके हैं.
पिछले हमलों में संसद भवन को नुकसान पहुंंचा था जिसे भारत ने पुन: दुबारा मरम्मत से बना दिया था.

राजधानी काबुल में पहले भारतीय दूतावास व कान्सुलेट पर भी हमले हो चुके हैं.
अफगानिस्तान से अमेरिकी नेतृत्व की नाटो की फौजें अफगानिस्तान से 2014 नवंबर में हट चुकी है. अभी उनकी एक बटालियन निगरानी के लिये बनी हुई है और वह कार्यवाहियों में भाग नहीं लेती है.

अफगानिस्तान में सन् 60 के दशक में सोवियत संघ (रूस) का कब्जा था. उसके हटने के बाद वहां सत्ता हथियाने के लिये विभिन्न गुटों में गृह युद्ध छिड़ गया था. उसी भ्रामक स्थिति में वहां सऊदी अरब का एक नागरिक ओसामा बिन लादेन ने तालिबानी संगठन बनाया और वहां का शासक बन बैठा था. अमेरिका ने न्यूयार्क में वल्र्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के प्रतिकार में अफगानिस्तान पर हमला कर ओसामा बिन लादेन के शासन को उखाड़ फेंका और बाद में ओसामा को पाकिस्तान के एब्टाबाद में मार डाला. इसके बाद अमेरिकी की अफगानिस्तान में उद्देश्य पूर्ति हो गयी और वह वहां चुनी हुई नागरिक सत्ता को सत्ता सौंपकर अलग हो गया है. वहां तालिबान फिर से अपना शासन स्थापित करना चाहता है और इस बार उसका इरादा अफगानिस्तान और पाकिस्तान से एक साथ सत्ता हथियाने का है. यदि तालिबानी पाकिस्तान में कामयाब हुए तो भारत के लिए काश्मीर में भी खतरा बढ़ जायेगा.

पाकिस्तानी-तालिबानी भारत में भी पहले श्रीनगर में जम्मू कश्मीर में असेम्बली पर इसी तरह हमला किया था कि कार से गेट तोड़ते हुए अंदर दाखिल हुए थे और गोलीबारी की थी. बाद में इसी तरह भारतीय संसद पर भी 2003 में कार में घुसकर हमला किया था जिसमें सभी 4 आतंकी और भारतीय सुरक्षा के 11 व्यक्ति मारे गये थे.

इन दिनों आतंक के क्षेत्र में भी तालिबान और ‘इस्लामिक स्टेटÓ के बाद वर्चस्व बनाने का संघर्ष मचा है. कई तालिबानी इस्लामिक स्टेट में शामिल हो चुके हैं. अरब राष्टï्रों में इराक सीरिया और पूर्वी अफ्रीकी मुस्लिम राष्टï्र नाइजीरिया में भी यह सक्रिय है.