वे सैनिक नहीं थे लेकिन देश और सेना को आधुनिक युग की हथियार प्रणाली मिसाइलें दे गये. इनमें भी यह विशेषता दी कि वे पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीक से बनाई जाती हैं. किसी भी चीज के लिये विदेशों पर निर्भरता नहीं रहेगी. वे जीवन पर्यन्त रक्षा वैज्ञानिक और लम्बे समय तक देश के रक्षा सलाहकार रहे. वे

अंतरिक्ष विज्ञान पुरुष भी थे उन्होंने देश को सेटेलाइट (उपग्रहों) को अंतरिक्ष में स्थापित करने वाली एल.एस.एल.वी. प्रणाली दी जिससे पहली बार रोहणी उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित किया गया था. इससे पहले भारत के उपग्रह दक्षिण अमेरिका के ग्वाइना और रूस से अंतरिक्ष में भेजे जाते थे. अब भारत कई विकसित देशों के भी उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करने लगा है.

वे पद्म भूषण, पद्म विभूषण और सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किये गये. इस उपाधि से पहले ही वे राष्ट्र को अपने वैज्ञानिक ज्ञान से बहुत कुछ देकर देशरत्न तो बन ही चुके थे. वे भारत के 11वें राष्ट्रपति थे और पहले दिन से विनम्रता की मिसाल बन गये. राष्ट्रपति भवन में जो भी प्रणाली चल रही थी उसी के तहत जब एक अधिकारी उनके सामने कोई फाइल लेकर गया तो उन्होंने उससे कुर्सी पर बैठने को कहा. वह वहां की परिपाटी के अनुसार खड़ा ही रहा और फाइल के बारे में बताने लगा तो श्री कलाम ने बड़ी ही विनम्रता से उससे आग्रह करते हुए कहा-”बात तो तभी होगी जब आप कुर्सी पर बैठ जायेंगे.ÓÓ और उसे बैठना पड़ा. उनका स्टाफ उनके सामने बैठकर ही बात करता था- यह कलाम परिपाटी थी.

ऐसा जीवन्त जीवन मृत्यु पर्यंत जिया कि अंतिम समय में वे मंच पर थे और शिलांग में आई.आई.एम. के छात्रों को संबोधित कर रहे थे. राष्टï्रपति पद से मुक्त होने के बाद शिक्षा जगत से जुड़ गये थे और अंतिम सांस भी उन्होंने एक शिक्षण संस्था के मंच पर ली.

आज भारतीय सेनाओं की मारक शक्ति के रूप में विकसित पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, आकाश व नाग मिसाइलें उनका चिर स्थाई स्मारक रहेंगी. इन मिसाइलों से पहले भारत अपने असहज पड़ोसी चीन की मिसाइलों के हद में था आज चीन और पाकिस्तान भारतीय मिसाइलों की परिधि में आ चुके हैं.

राजस्थान के पोखरण में प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी व श्री अटल बिहारी वाजपेयी के काल में जो परमाणु बम परीक्षण हुए थे, उनमें श्री कलाम का योगदान था. यह कहना भी कहीं से अतिशयोक्ति नहीं है कि भारतीय सेनाओं को शक्ति श्री कलाम ने दी है. 15 अक्टूबर 1931 को उनका जन्म तमिलनाडु के प्रमुख तीर्थ रामेश्वरम में हुआ था. श्री कलाम के नाम पर संयुक्त राष्टï्र ने 15 अक्टूबर को ”वल्र्ड स्टूडेंट डे” (विश्व छात्र दिवस) घोषित किया हुआ है.

आज सारा राष्टï्र उनके निधन से अवसाद की स्थिति में है. संसद उनको श्रद्धांजलि देकर स्थगित हो गयी. देश में 7 दिन का राष्टï्रीय शोक घोषित किया गया. उनके सम्मान में राष्टï्रीय ध्वज सभी जगह झुका रहेगा. उनके पैतृक गांव में उन्हें 30 जुलाई को दफनाया जायेगा.

उनकी कामना थी कि भारत इतनी प्रगति करे कि वह विश्व का सिरमौर बने. उन्हें हमारी यही सही श्रद्धांजलि होगी कि हम सब उनकी विनम्रता को अपना स्वयं का आचरण बनायें, राष्ट्र को भ्रष्टïाचार से मुक्त करें और देश को विश्व में सिरमौर राष्टï्र बनायें.

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