अभी कुछ समय पहले राजस्थान में खासकर और उसकी शह पर हरियाणा में गुर्जर आरक्षण बहुत ही हिंसक रूप में और सरकारों को चुनौती देते हुए लम्बे अर्से तक दो बार चला. मुम्बई-सेन्ट्रल और नई दिल्ली के अति महत्वपूर्ण रेल खंड पर महीनों रेल यातायात बंद रहा. लोगों को भारी परेशानी हुई. मालगाडिय़ों के आना-जाना रुकने से कई स्थानों पर उद्योग-व्यापार के माल सप्लाई की आवाजाही रुक गयी. गुर्जरों का यह आन्दोलन इसलिये था कि राजस्थान की ‘मीणाÓ जाति को पिछड़ी जाति मानकर 5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है इसलिये गुर्जरों को भी पिछड़ी जाति मानकर 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए. पहली बार के आन्दोलन पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाकर गुर्जर आंदोलन को खत्म कर देने व रेल यातायात को बहाल करने का आदेश देकर स्थिति को सामान्य कराया. अन्यथा सरकार हाथ पर हाथ धरे गुर्जर आंदोलन के समक्ष हताश व निराश अवस्था में थी. सुप्रीम कोर्ट की इस कार्यवाही के बाद दूसरी बार भी गुर्जरों ने फिर उसी तरह रेल रोको आन्दोलन चलाया. रेलवे ट्रेक पर उसी तरह शामियाने लगाये गये. जैसे शादियों व अन्य समारोहों में लगाये जाते हैं. इस दूसरी बार केन्द्र व राज्य सरकारों ने गुर्जरों को पिछड़ी जाति मानकर ‘मीणाÓ जाति के समान 5 प्रतिशत आरक्षण दे दिया. उसी समय यह भी जाहिर हो गया कि यह मांग जिस तरह की हिंसा व रेल रोको के पृष्ठïभूमि में मानी गयी है- वह अब अन्य जातियों के लिये यह खुला सरकारी निमंत्रण हो गया कि वे भी पूरा का पूरा हिंसक आंदोलन चलाये. रेल यातायात ठप्प कर दे तभी उनकी मांगें मानी जायेंगी. अब आरक्षण के अलावा अन्य सभी प्रकार के आन्दोलन के लिये सरकारों ने गुर्जर आन्दोलन की मांग मानकर देश में ही हिंसात्मक आन्दोलन, रेल यातायात की दुर्दशा व प्रजातंत्र की जगह देश में ‘भीड़ तंत्रÓ को लागू कर दिया है.

मीणा को आरक्षण देने से गुर्जरों ने आरक्षण मांगा और अब गुर्जरों को आरक्षण देने से गुजरात के पटेल भी उसी तरह हिंसा, आगजनी, रेल रोको से पटेल (पाटीदार) समुदाय को पिछड़ी जाति मनवाने और उसके लिये आरक्षण की मांग पर गुजरात में आंदोलन छेड़ दिया है.

अब जब देश में एक के बाद दूसरी और यह पिछड़ी जातियों की श्रृंखला बढ़ती जा रही है तो इसका अर्थ और निष्कर्ष यही होगा कि देश में पिछड़ी जातियां बढ़ती जा रही हैं और विकास नहीं हो रहा है. वह दिन भी दूर नहीं है जब देश की हर जाति के लिये एक निश्चित आरक्षण देना होगा. इतने बड़े भूभाग में इतनी जातियां और उनकी भी उपजातियां हैं कि 100 प्रतिशत की विभाजित गणना (ऐलोकेविल) ही नहीं रहेगी.

देश की यह दुर्गति साझा सरकारों के आने से उनकी राजनैतिक कमजोरी व उसकी बाध्यता में हुई है. वी.पी. सिंह सरकार को बाहर से भारतीय जनता पार्टी का समर्थन था. उन्होंने उस दबाव में राम मंदिर के मुद्दे को ‘कैशÓ करना चाहा. प्रधानमंत्री श्री वी.पी. सिंह ने ‘दाखिल दफ्तरÓ हो गयी मंडल कमीशन की रिपोर्ट को धूल झाड़ पोंछकर निकाला और 27 प्रतिशत ओ.बी.सी. (अदर बेकवर्ड क्लासिस) के नाम से लागू कर दिया. उन्होंने भाजपा के मंदिर मुद्दे का जवाब ‘मंडलÓ कमीशन रिपोर्ट से देकर देश में आरक्षण का जहर फैला दिया. यह ‘जिनÓ बोतल से बाहर आ गया है जिसे फिर से बोतल में बंद करना ही होगा. मंडल कमीशन रिपोर्ट व सभी ओबीसी आरक्षण फौरन खत्म किया जाए. मंडल रिपोर्ट से जो डाक्टर अम्बेडकर फार्मूले में संशोधन किया गया है वह घातक साबित हो रहा है. डाक्टर अम्बेडकर ने संविधान में केवल जनजाति (ट्राइबल) और अनुसूचित जातियों में केवल उन दो जातियों के लिए आरक्षण व्यवस्था की थी जिन्हें हमेशा से उनके कार्य (मैला उठाना व ढोर का चमड़ा उतारना) के कारण अछूत माना गया था. आरक्षण पर पूरा हक केवल वनवासी आदिवासियों व उन जातियों का है जो ‘अछूतÓ मानी गयी थीं. दूसरी जातियां मंडल कमीशन व ओ.बी.सी. के नाम पर इन तीन जातियों का हक छीन रही हैं. इन तीन के अलावा कोई आरक्षण का पात्र नहीं है. अम्बेडकर व्यवस्था को बदलने से देश का अहित हो
रहा है.

Related Posts: