मुंबई . तेल की कम मांग और बढ़ते उत्पादन के ताजा अनुमानों के बाद पिछले दो महीनों में इसकी कीमतें और गिरी हैं. पिछले दो महीनों में कीमतें करीब 30 फीसदी गिर चुकी हैं. विश्लेषकों ने तेल की कीमतों में और गिरावट के अनुमान जारी करने शुरू कर दिए हैं, जिससे डब्ल्यूटीआई कच्चेऑयल मार्च, 2009 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है और ब्रेंट कच्चेसाढ़े छह साल के निचले स्तर को छू सकता है.

पिछले कुछ दिनों से डब्ल्यूटीआई कच्चे42 डॉलर से थोड़ा नीचे बना हुआ है, जो इस स्तर पर मार्च 2009 में था. सीएलएसए के प्रबंध निदेशक और मुख्य रणनीतिकार क्रिस्टोफर वुड ने कहा, तेल की कीमतें 40 डॉलर के स्तर पर आएंगी. हालांकि निस्संदेह अल्पकालिक उछाल के भी आसार हैं. इसकी वजह यह है कि शेल उत्पादन में कुशलता आ रही है, जिससे उत्पादन की सीमांत लागत घट रही है.

वुड ने कहा कि अमेरिका में शेल गैस के उत्पादन में कुशलता आ रही है, जिससे यह नहीं माना जा सकता कि सऊदी अरब बाजार हिस्सेदारी की जंग जीतने में सफल होगा. उन्होंने कहा, इसका पता इस बात से चलता है कि अमेरिका में घटती रिग संख्या के बावजूद उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है. इस तरह अमेरिका में रिग की संख्या अक्टूबर 2014 के सर्वोच्च स्तर से करीब 58 फीसदी घट चुकी है, जबकि अमेरिका में इस अवधि में कच्चे तेल का उत्पादन 6 फीसदी बढ़ा है. इसे देखते हुए यह तय है कि ब्रेंट कच्चेऑयल की कीमतें भी डब्ल्यूटीआई तेल के साथ गिरेंगी. तेल की कीमतें जून 2014 में 100 डॉलर से ऊपर थीं, लेकिन अमेरिकी शेल गैस उत्पादकों और पश्चिमी एशियाई देशों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण कीमतें गिरी हैं.

कमजोर वैश्विक आर्थिक वृद्धि और कच्चे तेल के बढ़ते उत्पादन से कीमतों में भारी गिरावट आई है. कुछ दिन पहले सऊदी अरब ने कहा कि वह अपने तेल उत्पादन को घटा रहा है. हालांकि प्रतिद्वंद्वी पेट्रोलियम निर्यातक देशों के समूह (ओपेक) के सदस्यों ने समूह का उत्पादन वर्ष 2012 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है. ओपेक के इराक और अन्य सदस्य देशों के आगे भी ज्यादा तेल उत्पादन जारी रखने के आसार हैं.

विश्लेषकों का कहना है कि हाल के महीनों में दैनिक उत्पादन बढ़ाकर 1 करोड़ बैरल इसलिए किया गया है क्योंकि गर्मियों में बिजली की ज्यादा मांग पूरी करने के लिए तेल की जरूरत थी और देश की नई रिफाइनरियों ने स्टॉक किया है. सऊदी अरब और इराक की अगुआई में ओपेक का उत्पादन इस बार गर्मियों में बढ़ा है, जिससे वैश्विक सरप्लस में इजाफा हुआ है. ओपेक ने मंगलवार को कहा कि यूएस शेल और ओपेक से इतर देशों की आपूर्ति अनुमान से ज्यादा रही है. वुड ने कहा सबसे ज्यादा हलचल तेल की अगुआई वाले जिंस बाजार में है, जहां ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स फरवरी 2002 के बाद के सबसे निचले स्तर पर है. लंदन स्थित एक अन्य प्रमुख जिंस अनुसंधान संस्था नेटिक्सिज ने तेल की कीमतों में और गिरावट का अनुमान जताा है.

नेटिक्सिज कमोडिटीज में प्रमुख तेल बाजारों के विश्लेषक अभिषेक देशपांडे का मानना है कि हाल में तेल की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह चीन में कमजोर वृद्धि के आंकड़े, ईरान पर प्रतिबंध हटना और तेल की अति आपूर्ति हैं. उन्होंने कहा, जिंस बाजारों, विशेष रूप से अत्यधित आपूर्ति के चलते वैश्विक तेल एवं तेल उत्पादों में कमजोरी और चीनी अर्थव्यवस्था में सुस्ती और डॉलर में मजबूती की संभावना से हमने तेल कीमतों के अनुमान में फिर से संशोधन किया है.
नेटिक्सिज ने वर्ष 2015 के लिए डब्ल्यूटीआई की औसत कीमत का अनुमान घटाकर 47.8 डॉलर कर दिया है. इस वर्ष अब तक का औसत स्तर 52.39 डॉलर रहा है. वर्ष 2016 के लिए इसका औसत अनुमान डब्ल्यूटीआई के लिए 41 और ब्रेंट के लिए 45 डॉलर है.

Related Posts: