आंध्रप्रदेश से तेलंगाना के विभाजन के बाद राजधानी हैदराबाद अभी सीमान्त आंध्र व तेलंगाना की संयुक्त राजधानी उसी तरह बनी हुई है जैसे चंडीगढ़ पंजाब व हरियाणा के विभाजन के बाद दोनों राज्यों की राजधानी है. यह भी माना जा चुका है कि हरियाणा अपनी राजधानी अलग बनायेगा और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून अस्थाई है वह भी नयी राजधानी बनायेगा. लेकिन इन दोनों राज्यों में इस दिशा में मामला ठंडा ही पड़ा हुआ है. लेकिन हमेशा चुस्ती-फुर्ती में रहने वाले सीमान्त आंध्र के मुख्यमंत्री श्री चन्द्रबाबू नायडू ने जल्द से जल्द अपने राज्य की नयी राजधानी अमरावती को कार्यरूप दे दिया.

दशहरा के दिन 22 अक्टूबर को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इसकी आधारशिला गुन्टूर जिले के उद्दनदारयुनी पलेम गांव में रखी. नयी राजधानी गुन्टूर विजयवाड़ा जिलों में 50 हजार एकड़ भूमि पर बनेगी और इसके 392 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आबादी होगी. इसका पहला चरण 2018 अगले तीन सालों में पूरा हो जाएगा और सीमान्त आंध्र की राजधानी वहां चली जाएगी और उसके बाद बाकी चरणों का काम लगातार सम्पूर्ण निर्माण तक रफ्तार में ही चलाया जाएगा.

इससे पहले भी एकीकृत आंध्र में श्री चन्द्रबाबू नायडू राज्य के अनेक बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उन्होंने उन समयों में राजधानी हैदराबाद को भारत का साइबर नगर बना दिया था और वे सरकारी कार्यालय को कागजविहीन (पेपर लेस) नये कम्प्यूटर व सूचना क्रान्ति के क्षेत्र में ले गये थे.

भारत में ब्रिटिश काल में 1910-11 के आसपास अंग्रेज वास्तुविद् (आर्कीटेक्ट) …. श्री लुरियन ने नयी दिल्ली बनायी थी. यह पुरानी दिल्ली का नया विस्तार थी, लेकिन पंजाब, हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ बिल्कुल नये नगर के रूप में विकसित किया गया है. अन्य राज्यों की भी नयी राजधानियां बनी हैं, लेकिन वे पुरानी राजधानियों के संबद्ध शहर (सेटेलाइट टाऊन) के रूप में ही बनायी गयी हैं. गुजरात की राजधानी गांधीनगर उसकी पुरानी अहमदाबाद का ही सहनगर है. इसी तरह ओड़ीसा में भुवनेश्वर पुरानी राजधानी करकिका…. और असम में दिसपुर पुरानी राजधानी गुवाहाटी के सहनगर के रूप में विकसित हुई है. चंडीगढ़ के बाद ….दूसरी बार पूरी तरह से नये नगर के रूप में बनाया जायेगा. स्मार्ट सिटी की योजना के बाद यह एक ऐसा प्रोजेक्ट सामने आया है जिसे चन्द्रबाबू विश्व स्तर का भारत का सबसे आदर्श नगर बनाने जा रहे हैं. जहां आधुनिक युग अपने हर रूप-रंग और सुविधाओं से सुसज्जित होगा. कृष्णा नदी के तट की इस राजधानी की पानी की जरूरत इसी नदी से पूरी होगी.

इस नगर का समृद्धशाली प्राचीन इतहिास भी है. अमरावती 1800 साल पहले सतवाहन राजाओं की राजधानी थी. अब यह आधुनिक युग की भी अति आधुनिक राजधानी एक बार फिर से बनने जा रही है. इसकी जो रूपरेखा तैयार की जा रही है उससे तो यह निश्चित ही लगता है कि यह भारत का सर्वाधिक योजनाबद्ध देश में शहरों का मॉडल बन के सामने आते जा रहा है.

इसकी एक मानवीय व्यवस्था भी है कि इस राजधानी के लिये जिन लोगों की जमीन अधिग्रहीत की गयी है उन्हें नयी राजधानी में विशाल भूखंड आवंटित किया जायेगा. उन्हें ऐसे महसूस नहीं होना चाहिए कि वे अपनी जमीन से उखड़ गये बल्कि यह भावना रहेगी कि वे पहले से ज्यादा अति आधुनिक रूप में वहीं जमे हुए हैं.

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