वाशिंगटन/ सोल,

अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर कल पहले दौर की बातचीत पूरी हो गई और इसके बारे में अमेरिकी रूख यही रहा कि इस दिशा में अभी काफी कुछ किया जाना है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डाेनाल्ड ट्रंप ने पिछले वर्ष पद संभालने के बाद से अपने देश को 14 देशों वाले एशिया प्रशांत व्यापार समझौते से बाहर कर लिया था और उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौते(नाफ्टा) के लिए मैक्सिको तथा कनाडा के बीच नए सिरे से बातचीत शुरू की थी।उन्होंने दक्षिण कोरिया के साथ वर्ष 2012 में हुए समझौते की समीक्षा करने को कहा था।

नाफ्टा को लेकर अमेरिका का रूख कड़ा ही रहा है और इसमें अभी दो दौर की बातचीत के बाद कोई खास प्रगति नहीं हो सकी है।इसे लेकर यही कहा जा रहा है कि समझौते को बरकरार रखने के लिए कनाडा और मैक्सिको को रियायत देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।

अमेरिका का दक्षिण कोरिया के साथ व्यापार समझौते को लेकर मुख्य लक्ष्य यही है कि वह उत्तर कोरिया की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाते हुए दक्षिण कोरिया को आगे बढाए।अमेरिका -कोरिया मुक्त व्यापार समझौता वर्ष 2012 में हुआ था और उसके बाद से अमेरिका का उसके साथ वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर दो गुना हो गया था।

इस बातचीत में अमेरिका के सहायक वित्त प्रतिनिधि माइकल बीमान और दक्षिण कोरिया व्यापार मंत्रालय के मुक्त व्यापार समझौते के महानिदेशक यो मयू्ंग -ही ने हिस्सा लिया था।

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