अब लगभग यह तय है कि अमेरिका का राष्टï्रपति चुनाव डेमोक्रेटिव हिलेरी क्लिंटन और रिपब्लिकन श्री डोनाल्ड ट्रम्प के बीच होगा. सुपर ट्यूजडे के प्राइमरी चुनावों में ये दोनों ही अपनी-अपनी पार्टियों के उम्मीदवारों में आगे रहे और यह सुनिश्चित हो गया कि जल्द ही इनकी पार्टियां इन्हें राष्टï्रपति पद के लिये उम्मीदवार घोषित कर देंगी.

इस बार का चुनाव कुछ दूसरे ढंग से रोचक रहेगा. रिपब्लिकन ट्रम्प ऐसे उम्मीदवार है जिनकी कोई राजनैतिक पृष्ठïभूमि नहीं है. वे ‘रियल स्टेटÓ के बड़े उद्योगपति व निवेशक है. कई अमेरिकी कंपनियां जो भारत में काम कर रही है उनसे भी श्री ट्रम्प की बड़ी भागीदारी है. जब उन्होंने स्वयं को इस चुनाव के लिये आगे बढ़ाया तो किसी ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया. लेकिन एकाएक जब उन्होंने सिर्फ एक ही बयान दिया कि वे अमेरकिा में मुसलमानों का बसना रोक देंगे तो वे एकदम से सर्वप्रिय और लोकप्रिय हो गये.

ऐसा लगा जैसे ट्रम्प ने राजनैतिक ताश में ट्रम्प (तुरुप) चाल चल दी. वल्र्ड ट्रेड सेंटर पर इस्लामी आतंक का हमला अमेरिकी कभी भूल नहीं पायेंगे. ट्रम्प ने इसे ही ट्रम्प कार्ड बना दिया. आज वहां इस चुनाव में वे ही जीतने का आसार दिखा रहे है. डेमोक्रेट ने इसका जवाब इस तरह दिया कि ट्रम्प की यह नीति अमेरिका के मूल अस्तित्व के ही विरुद्ध है. अमेरिका विश्व का एक मात्र ऐसा देश है जिसके मूल निवासी ‘रेड इंडियन’ आज भारत के पारसियों की तरह सबसे कम संख्या में है और अमेरिका एक नाम ‘कंट्री ऑफ मिगरेंटÓ है. लेकिन श्री ट्रम्प ने केवल मुसलमानों को ही रोकने का इंगित किया है बाकी और किसी को नहीं इसलिए डेमोक्रेटिक जबाव अपने आप में खारिज हो गया.

अमेरिका में भी उसी तरह सीमा से अवैध घुसपैठ दक्षिण में भूमि से जुड़े राष्टï्र मेक्सिको से होती है जैसी भारत में पाकिस्तानी आतंकवादी सीमा पार से करते हैं. अमेरिका में मैक्सिको से अवैध घुसपैठ होना बहुत बड़ी समस्या बना हुआ है. उन्होंने भूमिगत सुरंगे बना रखी हैं और चोरी छिपे भारी संख्या में घुस चुके हैं. श्री ट्रम्प ने यह वादा किया है कि यदि वे जीते तो अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर पक्की दीवाल उठाकर सीमा सील कर देंगे. क्योंकि मेक्सिको से जो आते हैं वे अपराधी, ड्रग व हथियार के तस्कर हैं. ऐसा लगता है कि यह भी एक ‘बर्लिन वालÓ की तरह हो जायेगी. डेमोक्रेट हिलेरी क्लिंटन के पक्ष में भी जबरदस्त मुद्दे हैं जो उन्हें जिता सकते हैं.

एक तो अब अमेरिका में ‘श्वेतÓ और ‘अश्वेतÓ शब्दों का चलन खत्म होकर उन्हें अमेरिकन और अफ्रीकी अमेरिकन कहा जाने लगा. इतिहास में पहली बार डेमोक्रेट पार्टी ने अफ्रीकी मूल के बराक ओबामा के राष्टï्रपति चुनवा कर अफ्रीकी अमेरिकन को अपने पक्ष में कर लिया. इसके बाद से ही वहां के अफ्रीकी पूरी तरह अमेरिकी माने जाने लगे हैं. इनकी संख्या भी अमेरिका में बहुत है और वे हिलेरी के पक्ष में बहुत बड़ा मतदाता समुदाय है.

इस समुदाय को अपने पक्ष में करने के लिये श्री ट्रम्प ने वादा किया है कि अफ्रीकी युवाओं के लिये अमेरिका के विदेशों में चले गये रोजगार वापस लाकर उन्हें देंगे. लेकिन यह वादा अफ्रीकियों को हिलेरी से अलग नहीं कर पा रहा है. यदि हिलेरी जीतती हैं तो वह एक नया रिकार्ड होगा. एक तो डेमोक्रेट ने बराक ओबामा के रूप में पहला अफ्रीकी अमेरिका का राष्टï्रपति बनाया और हिलेरी के जीतने पर वे भी अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति होंगी. यह निश्चित ही लग रहा है कि अमेरिका की महिलायें भी वहां की राजनीति महिला श्रेष्ठïता स्थापित करने के लिये हिलेरी को ही वोट देकर जिताना चाह रही हैं.

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