इस्लामी स्टेट के आतंक से अरब राष्टï्रों में विश्व युद्ध आ ही गया है केवल इसकी औपचारिक घोषणा होना है. आमतौर पर युद्ध देशों के बीच उनकी सरकारों के विरुद्ध होते हैं. इराक और लीबिया में युद्ध वहां के राष्टï्रपति सद्दाम व कर्नल गद्दाफी की सरकारों के विरुद्ध हुए थे. लेकिन अफगानिस्तान में अमेरिकी नेतृत्व में नाटो देशों व फौजों का हमला वहां देश की सरकार के विरुद्ध न होकर ओसामा बिन लादेन के तालिबानी आतंकियों के विरुद्ध था.

उनसे अफगानिस्तान को मुक्त करा विदेशी फौजों ने वहां स्वदेशी राष्टï्रपति हमीद करजई का शासन स्थापित किया था. अब मुस्लिम अरब राष्टï्रों में वहां की सरकारों को बचाने के लिए युद्ध विदेशी सरकारें व फौजें उनके मुल्कों में लड़ रही है. यही इस समय यही हाल सीरिया का है. वहां फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, अमेरिका के हवाई हमले वहां की राष्टï्रपति अल असद सरकार के विरुद्ध नहीं है बल्कि उसे बचाने के लिये उनके विरुद्ध उठ खड़े हुए इस्लामी आतंकी हमले व उनके कब्जे में आ गये इलाकों पर है. अभी हाल ही में जो पेरिस पर हमला हुआ उसमें आतंकियों ने यही कहा कि वह सीरिया का बदला है लेकिन वे न तो सीरिया की जनता है और न ही वहां की सरकार है. वे वहां भी आतंकी घुसपैठिये है जिन्होंने सीरिया के कई इलाकों पर कब्जा कर
लिया है.

लेकिन अब इस स्थिति में रूस के राष्टï्रपति पुतिन के जी-20- शिखर सम्मेलन में दिये गये बयान में ऐसी स्थिति आ गयी है कि इस्लामी स्टेट के हमले मध्यपूर्व के 40 अरब मुस्लिम राष्टï्र उसे फन्ड देकर इराक व सीरिया को मिलाकर एक नया मुस्लिम राष्ट्र बनवाने के लिए कह रहे हैं. श्री पुतिन ने दमदारी से चेतावनी के स्वर में यह भी कहा कि उन 40 देशों में से कुछ उस समय वहीं जी-20 सम्मेलन में सदस्य राष्टï्र के रूप में बैठे हैं. श्री पुतिन ने यह भी उजागर किया कि हाल ही में मिस्र में जिस रूसी यात्री विमान को मार गिराया था जिसमें 224 लोग मारे गये थे- इस्लामी स्टेट का ही हमला था. उसके बाद रूस ने इस्लामी स्टेट पर बमबारी…. बढ़ा दी. अब फ्रान्स में राजधानी पेरिस में हमले के बाद फ्रान्स ने भी इस्लामी स्टेट पर हवाई हमले तेज कर दिये हैं. फ्रान्स और रूस में आपस में नेवी सहयोग भी हो गया है और अब दोनों राष्टï्र सीरिया पर समुद्री हमला करने जा रहे हैं.

फ्रान्स के राष्ट्रपति अमेरिकी राष्टï्रपति बराक ओबामा से मिलने वाशिंगटन जा रहे हैं- उसके बाद ये मास्को में श्री पुतिन से बात करेंगे. जर्मनी और ब्रिटेन पहले ही यह घोषणा कर चुके हैं कि इस्लामी स्टेट के विरुद्ध हमलों में साथ रहेंगे. अब जो युद्ध होने जा रहा है उसमें उन 40 देशों पर भी हमला होगा जो इस्लामी फन्ड और हथियारों से मदद कर रहे हैं. इस रूप में यह संसार में तीसरा विश्व युद्ध होने जा रहा है. इसमें सभी मुस्लिम राष्टï्रों पर हमला हो सकता है.

भारत भी इस्लामी स्टेट का खतरा व निशाना है. काश्मीर में मुस्लिम आबादी में उसकी घुसपैठ जाहिर हो गई है. उनके हर जुलूस व प्रदर्शन में इस्लामी स्टेट व पाकिस्तान के झंडे लहराये जाते हैं. पाकिस्तान भी उन राष्ट्रों में है जो इस्लामी स्टेट को फन्ड व सैनिक सहायता दे रहे हैं. आगामी अरब विश्व युद्ध में भारत की अहम भूमिका होगी.

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