भारत के लोग भारत की आजादी के समयकाल जिन्ना की मुस्लिम लीग की भारत विभाजन की भूमिका से देश में हिन्दू-मुसलमान दंगों के संदर्भ में साम्प्रदायिकता का अर्थ समझते हैं. लेकिन इस समय अरब राष्टï्रों में मुसलमानों के ही दो बड़े सम्प्रदाय शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच पहले आतंकवादी स्तर पर क्रूर हिंसात्मक मारकाट मची और अब वही शिया-सुन्नी टकराव अरब राष्ट्रों में सेनाओं का युद्ध बन गया है और इसने अरब युद्ध का रूप ले लिया है. जिसमें सभी अरब राष्टï्र शिया-सुन्नी आधार पर एक-दूसरे पर हवाई और सैनिक हमले कर रहे हैं. अरब युद्ध की शुरुआत इराक से हुई और इन दिनों यमन में घमासान लड़ाई हो रही है, जिसमें सभी अरब राष्टï्र आपस में उलझ
पड़े हैं.

अरब राष्ट्रों में ही दुनिया का सर्वाधिक पेट्रो क्रूड निकलता है. इस अरब युद्ध से उसकी स्थिति भी बहुत डांवाडोल हो गयी. अरब युद्ध से एक तो सभी अरब राष्ट्रों में पेट्रो क्रूड का उत्पादन कम हो जायेगा और उसका समुद्री टैंकरों से परिवहन भी नहीं हो पायेगा. इससे दुनिया में पेट्रोल-डीजल व अन्य पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति में भारी अभाव व मूल्यवृद्धि की स्थिति बन जायेगी. साथ ही यह संभावना भी नजर आने लगी है कि पेट्रो उत्पादन व बिक्री के अस्त-व्यस्त हो जाने से सभी अरब राष्टï्र जिनकी अर्थ-व्यवस्था इसी पर निर्भर है, वह भी दिवालिया व कंगाल होने की स्थिति में आ सकते हैं. अरब राष्टï्र इन दिनों मुसलमानों की आंतरिक साम्प्रदायिकता में ही ध्वस्त होते नजर आ रहे हैं.

अरब राष्ट्रों मेें सबसे ज्यादा सुन्नी मुसलमानों का बाहुल्य है और मक्का-मदीना का राष्टï्र सऊदी अरब सबसे प्रमुख व शक्तिशाली सुन्नी मुसलमान राष्टï्र है. वहीं इरान पूरी तौर पर शिया मुसलमानों का बड़ा शक्तिशाली राष्ट्र है. तीसरे नम्बर पर इराक आता है जो शिया और सुन्नियों में बंटा हुआ है. यहां सुन्नी 60 और शिया 40 प्रतिशत हैं. शिया-सुन्नी कटुता व साम्प्रदायिकता की पृष्ठïभूमि ईराक-सद्दाम हुसैन और अमेरिका है. यहां सद्दाम सुन्नी थे और जब वे राष्ट्रपति थे तो उन्होंने शियाओं के साथ बहुत भेदभाव व दमन किया. जब अन्तरराष्टï्रीय राजनीति में अमेरिका का सद्दाम हुसैन से टकराव हुआ और अमेरिका ने सद्दाम को उखाड़ फेंका और फांसी पर टांग दिया. उसके बाद अमेरिका ने वहां शियाओं को इराक की सत्ता में काबिज कर दिया. वही कटुता ऐसी बढ़ी कि आज ‘इस्लामी स्टेटÓ के लिये सुन्नियों ने शियाओं पर हमले कर दिये. सबसे पहले उन्होंने इराक में शिया शासकों के खिलाफ युद्ध छेड़ा. जाहिर है इससे अमेरिका शिया शासकों की रक्षा में आगे आ गया और इन दिनों भी ईराक में अमेरिका उसकी एयरफोर्स से सुन्नियों पर हमले कर रहा है. दूसरी ओर शियाओं ने यमन में सुन्नी राष्टï्रपति हादी की सरकार के विरुद्ध विद्रोही युद्ध छेड़ दिया और शिया राष्टï्र इरान उनकी पूरी मदद कर रहा है. यमन के सुन्नी राष्टï्रपति हादी भाग कर सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुंच गये. सऊदी अरब ने उनकी सरकार बचाने के लिये यमन में शियाओं पर 100 फाइटर जेट से हïवाई हमले कर दिये और सेनायें भी भेज दीं. मिस्र भी सुन्नी बाहुल्य है. उसने भी अपने जंगी पानी के जहाज यमन में हादी सरकार को बचाने भेजे. सभी खाड़ी राष्टï्र संयुक्त अरब अमीरात, कतार, कुवैत, बहरीन, जोर्डन सभी कूद पड़े हैं. इस समय अरब युद्ध में सऊदी अरब (सुन्नी) और इरान (शिया) आमने-सामने हैं और अमेरिका भी जंग के मैदान में शियाओं के साथ ”इस्लामी स्टेटÓÓ को सीरिया में कुचलने के लिए ईराक व सीरिया में हवाई हमले कर रहा है और सऊदी अरब यमन में हवाई हमले कर रहा है. यमन में ध्वस्त मकानों का मलबा व लाशों का ढेर लगा है.

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