चिटनिस ने किया कृषि अनुसंधान कार्यशाला का शुभारंभ

भोपाल,

शुक्रवार को महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के क्षेत्रिय कार्यशाला का शुभारंभ एवं प्र्रदर्शनी का उद्घाटन किया. इसमें मध्यप्र्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं उड़ीसा सहित अन्य राज्यों से आए कृषि वैज्ञानिक शामिल हो रहे है.

कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए मंत्री अर्चना चिटनिस ने कहा कि शोध आसान नहीं, बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए. खेती, हमारी भारतीय अर्थव्यवस्था में केवल धंधा-व्यापार का साधन नहीं वरन् खेती धर्म है. कृषि अपने जीवन का आधार है.

परंपरागत खाद्यान्न बाजरा, कोदो, कुटकी, मक्का, ‘ज्वार आदि ऐसे अनाज रहे जो मानव जीवन के लिए बेहतर और स्वास्थ्यवर्धक वरदान साबित हुए है. कार्यशाला में कृषि अनुसंधान के साथ-साथ न्यूट्रीशियंस लिट्रेसी पर भी चर्चा की जाकर गांव, समाज और कृषि क्षेत्र में मानव जीवन के लिए पोषक कृषि उत्पाद को लेकर जनजागरण-आंदोलन कैसा बनाया जा सके.

चिटनिस ने कहा कि भारत शासन द्वारा कस्बाई क्षेत्र बुरहानपुर में तीन राज्यों की क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन ”नवाचार” स्वरूप में होने जा रहा है.

मुझे विश्वास है कि इस नवाचार से जो इतिहास बना उसके साथ ही साथ आ यहां इस कार्यशाला से ऐसा परिणाम आउटपुट देेंगे जिससे यह कार्यशाला ऐतिहासिक होकर सार्थक सिद्ध हो सकेंगी. इस क्षेत्र के उत्पादन केला, कपास, उद्यानिकी और कृषि के प्र्रगतिशील कृषकों के खेतों में पहुंचकर जमीनी स्तर से ऐसी शोध करेंगे जो लघु सीमांत कृषक के लिए उपयोगी और लाभकारी सिद्ध होगी.

उन्होंने कहा कि ज्ञान-विज्ञान और किसान की कर्मण्यता के साथ आप के अनुसंधान का परिणाम बुरहानपुुर से निकलकर संपूर्ण भारत वर्ष के किसानों की आय को दुगना करने में सहायक सिद्ध हो ऐसी कामना करती है.

केवल कृषि आय को दुगना करना ही प्र्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री शिवराजसिंह का लक्ष्य नहीं है वरन् कृषि आय को दुगना करने के साथ-साथ कृषि की पोषकता और नागरिकों को पौष्टिक (न्यूट्रीशियंस) आहार की उपलब्धता भी इसी प्र्रकार के कृषि अनुसंधानों से कृषि उत्पाद संभव कराना हैं.

जिसके लिए सभी कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषकों सहित समस्त समाज को न्यूट्रीशियंस सेंसेटिव एक्टीविटी की ओर ध्यान देना होगा. हमें मार्केट स्मार्ट, न्यूट्रीशियंस स्मार्ट, क्लाईमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर को विकसित करना होगा.

चिटनिस ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा स्थानीय जलवायु, मौसम, उ लब्ध जल एवं मिट्टी आदि के आधार पर उनकी आय वृद्धि के लिए कृषि उत्पाद की जानकारियां और अनुसंधान निरंतर करते रहना चाहिए.

निम्न, मध्यम एवं उच्च आय वर्ग के किसानों के लिए पृृथक-पृृथक कृषि अनुसंधान किए जाने चाहिए. लघु एवं सीमांत कृषक को ध्यान में रखकर कृषि अनुसंधान करने से किसान को विज्ञान और आ के ज्ञान का लाभ अत्याधिक प्र्राप्त हो सकेंगा.

खेती के साथ पशुपालन और अन्य उपक्रम (उद्योग) से किसान की आर्थिक स्थिति को ऊंचा उठाना आसान विधि सिद्ध हो सकती है. जिसके लिए सरकार के साथ-साथ कृषि विज्ञान केन्द्र और कृषि वैज्ञानिकों की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण साबित हो सके.

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