नयी दिल्ली, 11 सितम्बर.  मनमोहन सरकार की गिरती साख एवं निराशाजनक आर्थिक आंकडों के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर भारत के लोगों का विश्वास डगमगा रहा है तथा 62 प्रतिशत लोग हालात से असंतुष्ट हैं.

बांसठ फीसदी जनता वर्तमान हालात से असंतुष्ट

जनता की मनोदशा का आकलन करने वाली जानी मानी अंतरराष्ट्रीय संस्था पिड रिसर्च सेंटर ने अपने नवीनतम सर्वेक्षण में कहा है कि उभरी हुयी अर्थव्यवस्थाओं वाले अन्य देशों चीन और ब्राजील की तुलना में भारत में ंंअधिक निराशा व्याप्त है तथा केवल 38 प्रतिशत लोग ही यह मान रहे है ं कि देश सही दिशा में जा रहा है. आर्थिक मंत्री की मार झेल रहे चीन में जनता का 82 प्रतिशत अर्थव्यवस्था को लेकर अभी भी आशावान है जबकि ब्राजील में यह प्रतिशत 43 है.

सर्वे में पाया गया कि भारत में 51 प्रतिशत लोग अपनी आर्थिक दशा से खुश नहीं है जबकि 55 प्रतिशत अगले एक वर्ष में अर्थव्यवस्था में सुधार को लेकर निराश हैं . भारत के लोग अपने बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं तथा 66 प्रतिशत का मानना है कि भावीपीढ़ी के लिये नौकरी हासिल करना और मौजूदा जीवनस्तर से ऊपर उठना मुश्किल काम है . पिछले एक दशक में आर्थिक वृद्धि के कारण मौजूदा पीढ़ी के लोगों का मानना है कि उनकी आर्थिक स्थिति उनके मां बाप से बेहतर रही तथा इस समय भी उनकी माली हालत ठीक है . आर्थिक स्थिति को लेकर अमीरों, मध्यम वर्ग और गरीबों की राय में काफी अंतर है. 77 प्रतिशत अमीर लोगों का कहना है कि इस समय उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी है जबकि गरीबों में ऐसा मानने वालों का प्रतिशत 52 प्रतिशत है. 76 प्रतिशत अमीरों का मानना है कि आज उनकी आर्थिक स्थिति मां-बाप की तुलना में बेहतर है जबकि गरीबों में ऐसा मानने वालों का प्रतिशत 61 है.

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