Supreme-Courtनयी दिल्ली,  उच्चतम न्यायालय ने जम्मू कश्मीर में अलगाववादी समूहों को मिलने वाली सरकारी सहायता को तत्काल प्रभाव से बंद कराने संबंधी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए 14 सितम्बर की तारीख मुकर्रर की है। न्यायमूर्ति अनिल आर.दवे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने वकील मनोहर लाल शर्मा की याचिका सुनवाई के लिए मंजूर करते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर की स्थिति को लेकर उसका भी वही भाव है।

श्री शर्मा ने विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के हवाले से दलील दी कि जम्मू कश्मीर के अलगाववादी समूहों के ठहरने, उनकी सुरक्षा और यात्रा पर सैकड़ों करोड़ रुपये प्रतिवर्ष खर्च होते हैं, इसके बावजूद ये अलगाववादी नेता भारत के खिलाफ जहर उगलते हैं। याचिकाकर्ता ने सरकार द्वारा इन अलगाववादियों पर किये जा रहे खर्च को तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग करते हुए कहा कि ऐसे लोगों पर आम आदमी की गाढ़ी कमाई के पैसे खर्च करना असंवैधानिक और गैर-कानूनी है।

याचिका में कहा गया है कि पिछले पांच वर्ष में भारत ने इन अलगाववादियों की सुरक्षा पर 356 करोड़ रुपये खर्च किये हैं। सरकार ने इन्हें लक्जरी होटल में ठहराने पर 21 करोड़ गंवाये हैं, जबकि भारत-विरोधी विष वमन के लिए की गयी यात्राओं पर भी 26.43 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए 14 सितम्बर की तारीख मुकर्रर करते हुए कहा, “हम भी समान भावना रखते हैं।”

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