mp1पांढुरना (छिंदवाड़ा),   पूरी दुनिया में अमन चैन की मुराद लिए एवं ख्वाजा के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के मुख्य उद्देश्य से कर्नाटक के एक 57 वर्षीय बुजुर्गवार जीवन के इस पड़ाव में हज यात्रा के लिए पैदल ही रवाना हुए.

पांच देशों से होकर सात हजार किलोमीटर की यह हज यात्रा पैदल ही पूरा करने की मंशा लिए शीत ऋतु की कड़कडाती ठंड़ में अपने सफर की शुरूवात करने के बाद अब ग्रीष्म ऋतु की झुलसा देने वाली तेज तपन एवं असहनीय गर्म हवाओं के थपेड़ों को सहते हुए 41 दिनों तक लगभग 1400 किलोमीटर का सफर पैदल ही तय कर पांढुरना पहुंचते ही इनका यहां गर्म जोशी से इस्तकबाल किया .

हूजुर के दीदार की जिसने ठान ली हो और जिनके हौसंले बुलंद हो, उनकी राहों में चाहे जितनी भी कठिनाईयाँ आएं, वह हंस कर इसे पार कर ख्वाजा के दरगाह में सजदा करने पहुंच ही जाता है. कुछ इसी अंदाज में मस्जिद गुलशनै बगदाद पांचवा क्रस उमर नगर गोविंदपुर बैंगलौर कर्नाटक में रहने वाले मोहम्मद रहमत उल्ला पिता अब्दुल अजीज खान ने 57 वर्ष की उम्र के इस पड़ाव में सात हजार किमी तक की यह हज यात्रा तय करने के लिए पैदल ही अपने गृह शहर बैगलौर से रवाना हुए हैं.

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