8tribal museumभोपाल, 8 मार्च,उत्तराधिकार श्रृंखला के अन्तर्गत जनजातीय संग्रहालय में ‘फ गुआ गायन’ में अवधी और मालवी बोलियों में गाये जाने वाले पारम्परिक होली गीतों की संध्या का संयोजन किया गया. सांस्कृतिक संध्या में वन्दना मिश्रा फैजाबाद और प्रीति देवले उज्जैन द्वारा अपने साथियों के साथ पारम्परिक होली गीतों की प्रस्तुतियाँ दी गईं.

अयोध्या से आई वन्दना ने अपनी गायिकी में श्री राम और उनके अनुजों के साथ होली खेलने के दृश्यों को सजीव कर दिया. होली के पर्व के मूल में हम अपने पुरा-पड़ौस और सहोदरों के प्रति हर तरह के कलशों और सभी प्रकार की रंगहीनता को रंग से भर देने के प्रयास की तरह अवधी के गीतों में अपनी छटा बिखेरी है. वह अवधी लोक गीतों की परम्पराओं को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में प्रयासरत हैं. इन्होंने उत्तरप्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश के अलावा अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी हैं. इसके साथ ही मालवी गायिका प्रीति देवले ने सहयोगियों के साथ मालवा के प्रचलित और पारम्परिक गीतों का मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय के मुक्ताकाश मंच पर गायन किया.

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