केंद्रीय मंत्री मंडल ने एक महत्वपूर्ण और सामाजिक वेदना के मामले में निर्णय लिया है जिससे अपराध की गंभीरता के आधार पर बाल अपराधी व अवयस्क अपराधी में फर्क किया जायेगा. केवल आय सेें ही अपराध का निर्णय नहीं होगा. अब बाल अपराधी वही माना जायेंगे जो अबोध व नादान होंगे जिनमें यह समझ नहीं होगी कि उन्होंने क्या अपराध किया है. लेकिन अवयस्क आयु का अपराधी बलात्कार, हत्या, चोरी-डकैती, प्राणघातक हमले आदि ऐसे अपराध करता है

जिसके बारे में वह समझ व इरादा रखता है उसे बाल अपराध न्ययाालय उसके इस अपराध और उसकी समझ के आधार पर निर्णय करेगा और बाल न्यायालय उसे न्यायिक अदालतों को उसे वयस्क मान कर उस पर भारतीय दंड विधान की धाराओं के अंतर्गत उस पर मुकदमा चलाने व सजा देने के लिये संदर्भित (कमिट) उसी तरह कर सकेगा जैसे छोटी न्यायिक अदालतें हत्या जैसे गंभीर मसलों को सेशन्स कोर्ट को कमिट कर देती है.

निर्भया कांड के होते ही देश भर में इस बात पर बड़ी वेदना व क्षोभ व्याप्त हो गया कि उन बलात्कारियों में जो सबसे बर्बर था उसे महज इस आधार पर कि अपराध के समय उसकी आयु 18 साल से 6 महीने कम थी इसलिए कानून की परिधि में वह बाल अपराधी और ज्यादा से ज्यादा 3 साल की साधारण सजा दी जा सकी. उसी समय से यह बहस चल पड़ी है कि सजा आयु के आधार पर नहीं होकर अपराध की गंभीरता और उसकी समझ के आधार पर होना चाहिए. यौन अपने आप में आयु की वयस्कता होता है. उसकी समझबूझ युवा अवस्था व वयस्कता होती है.

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार सन् 2013 में रिकार्ड में आ गये मामलों में 2074 अवयस्कों ने बलात्कार के अपराध किये. इनमें से अधिकांश 2054 बलात्कार के अपराधी 16 से 18 साल की उम्र के थे. दिल्ली के निर्भया कांड के लगभग दो साल बाद मुंबई के परेल इलाके में खाली पड़ी शक्ति टेक्सटाइल मिल की वीरान इमारत में कुछ अपराधी रोजाना किसी लड़की या महिला के वहां से गुजरने पर उसे पकड़ लेते थे और बलात्कार के आदतन अपराधी बने हुए थे. एक घटना में ये लोग पकड़ में आ गए. इसमें से 2 को फांसी की सजा हुई जैसे

निर्भयाकांड में 5 को सजा हुई. लेकिन जिस तरह निर्भया कांड में एक अपराधी बाल अपराधी माना गया उसी तरह शक्ति मिल बलात्कार मामले में दो अपराधी बाल अपराधी के रूप में 3 साल के लिए सुधारगृह भेजे गये हैं.

अब केन्द्रीय मंत्री मंडल ने जो सामाजिक वेदना को समझते हुए जो निर्णय लिया है उससे अब अवयस्क अपराधी और अबोध बाल व अपराधियों में अंतर तय कर दिया है. जल्दी ही यह निर्णय संसद में विधेयक में प्रस्तुत होकर कानून बनने जा रहा है.