नयी दिल्ली,  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मानसिक रोग से ग्रसित लोगों के प्रति सोच में बदलाव लाने का आह्वान करते हुए आज कहा कि ऐसे नागरिकों को नकारने की बजाय अवसादग्रस्त तथा तनावग्रस्त रोगियों के रूप में देखा जाना चाहिए।

श्री कोविंद ने मानसिक स्वास्थ्य पर यहां आयोजित 21वें वैश्विक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि समाज का नजरिया अवसादग्रस्त रोगियों के प्रति ठीक नहीं है और उनकी अनदेखी करने की बजाये उनके रोग को ठीक करने के बारे में सोचा जाना चाहिए।

राष्ट्रपति ने इस बात पर गहरी चिंता जतायी कि हमारी आबादी के अनुपात में मानव संसाधन की बहुत कमी है। करीब सवा अरब की आबादी वाले देश में महज सात लाख डाक्टर हैं। मानसिक रोग के इलाज से जुड़े संसाधनों की स्थिति और भी खराब है। देश में मनोचिकित्सकों की संख्या करीब पांच हजार है और दो हजार से कम क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक हैं।

उन्होंने कहा कि देश में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाया जा रहा है और इसके तहत 22 विशिष्ठ केंद्रों को संचालित किया जा रहा हैं। इसके साथ ही देश के 650 जिलों में से 517 जिलों में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

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