विनय अग्रवाल ग्वालियर,

मध्यप्रदेश में भी उत्तर प्रदेश के नौएडा गौतम बुद्घनगर की तरह एक जिला है अशोक नगर। जहां मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी जाने के भय से कभी आते नहीं। पिछले 14 वर्षों से यहां प्रदेश की भाजपा सरकार का कोई भी मुख्यमंत्री नहीं आया।

उनके दौरे से पहले ही उनके पास यह खबर पहुंच जाती है कि अशोक नगर अभिशप्त जिला है यहां गये और रात्रि विश्राम किया तो आपकी कुर्सी किसी न किसी कारण से चली जायेगी। अशोक नगर की जनता भी अब अपने मुख्यमंत्री के दर्शन को तरस रही है।

वहीं भाजपा का एक खेमा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को अशोक नगर में लाने की प्लानिंग कर रहा हैं। लगभग 90 हजार की आबादी वाले अशोक नगर के शहरी क्षेत्र में यह मिथक वर्षों से नेताओं, सरकारी अधिकारियों व आम लोगों के जेहन में हैं कि कोई भी मुख्यमंत्री यहां आयेगा और रात्रि विश्राम करेगा तो 6 माह के भीतर उसकी कुर्सी चली जायेगी।

इस मिथक के कारण यहां मुख्यमंत्री आने से परहेज करते हैं। यदि किसी कारणवश मजबूरी में आना भी जड़े तो शहरी क्षेत्र में भूले से भी नहीं आते। दूरदराज के गांवों में हेलीकॉप्टर से आकर लौट जाते हैं। मुख्यमंत्रियों के न आने से यहां के डीएम से लेकर प्रशासनिक अधिकारी मजे में रहते है, उनको कोई रोकने टोकने वाला नहीं है।

मुख्यमंत्री नहीं आते तो प्रभारी मंत्री व अन्य विभागों के मंत्री भी यहां आने से कतराते हैं। स्थिति यह है कि 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे महत्वपूर्ण मौकों पर भी प्रभारी मंत्री यहां के प्रोग्राम नहीं बनाते, जिससे कलेक्टर ही वर्षों से यहां ध्वजारोहण कर रहे हैं।

अशोक नगर में मुख्यमंत्री के आने से उसकी कुर्सी जाने के मिथक से कोई भी मुख्यमंत्री रात्रि विश्राम तो क्या दिन में भी अशोक नगर के शहरी क्षेत्र में आने से कतराते हैं। कुछ मुख्यमंत्रियों ने इस मिथक को तोडऩे का प्रयास भी किया, लेकिन अशोक नगर के शहरी क्षेत्र में आने और रात्रि विश्राम करने के कारण उनकी कुर्सी 6 माह में चली गई।

पिछले 12 सालों से स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी यहां अभी तक नहीं आये है और न ही रात्रि विश्राम किया है। बताया जाता है कि कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री गोविंद नारायण सिंह, प्रकाशचंद्र सेठी और श्यामाचरण शुक्ल सहित आधा दर्जन से अधिक मुख्यमंत्रियों को अशोक नगर में जाने और रात्रि विश्राम करने के कारण 6 माह के भीतर ही अपनी कुर्सियों से हाथ धोना पड़ा था।

मुख्यमंत्री के अशोक नगर न आने से यहां की जनता अपने मुख्यमंत्रियों के दर्शन को तरस गई है। लोग व्यक्तिगत तो क्या शहर के विकास के लिये उन्हें मिलकर चर्चा ही नहीं कर पाते।

 

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