pranabअहमदाबाद,  राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने आज यहां महात्मा गांधी के ऐतिहासिक साबरमती आश्रम में उनसे जुडे दस्तावेजों के संग्रह और शोध केंद्र का उद्घाटन किया तथा उनके मूल निवास हृदय कुंज के प्रांगण में एक सभा को संबोधित करते हुए स्वच्छ भारत अभियान की चर्चा की और कहा कि असली गंदगी भारत की गलियों की धूल में नहीं बल्कि हमारी साेच तथा समाज को बांटने वाले इन विचारों को छोडने की हमारी अनिच्छा में हैं।

उन्होंने ऐसे विचारों को दिमाग से हटाने कर आंतरिक स्वच्छता फैलाने पर जोर दिया।

देश में असहिष्णुता के बारे में बयान दे चुके श्री मुखर्जी ने अपनी तीन दिवसीय गुजरात यात्रा के दूसरे दिन यहां साबरमती आश्रम में अपने संबोधन में हालांकि असहिष्णुता शब्द का सीधा इस्तेमाल नहीं किया पर उन्होंने समाज की एकता और बहुलवादी तानेबाने तथा विघटनकारी बातों की चर्चा की।

उन्होंने कहा कि गांधीजी का मानना था कि भारत एक समावेशी देश है जहां आबादी के हर हिस्सा बराबरी और अवसर की समानता का लाभ उठाता है। उन्होंने एक दूसरे के प्रति विश्वास को मानवता का सारतत्व तबतो हुए कहा कि हर रोज हम अपने इर्द गिर्द भारी हिंसा देखते हैं अौर इसके केंद्र में अंधकार, भय और अविश्वास ही है। इससे निपटने के तौर तरीकों की इजाद करते समय हमे बापू के बताये अहिंसा तथा बातचीत और तर्कसंगतता जैसी बातों को नहीं भूलना चाहिए। अहिंसा कोई नकारात्मक चीज नहीं हैं।

सार्वजनिक जीवन में शारिरिक अथवा शाब्दिक हिंसा को कोई स्थान नहीं होना चाहिए और केवल एक अहिंसक समाज में ही सभी वर्गों के लोग विशेष रूप से हाशिये पर रहने वाले गरीब लोगों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में शामिल किया जा सकेगा। गांधी जी ने प्राण त्यागते समय अपने मुख से राम शब्द का उच्चारण कर हमे अहिंसा का एक अदभुत उदाहरण दिया। हमे स्वच्छ भारत मिशन जैसे स्वागतयोग्य अभियान को सफल बनाना चाहिए पर इसे हमारी सोच की सफाई के एक बडे अभियान की शुरूआत के तौर पर देखा जाना चाहिए ताकि हम इसके जरिये 2 अक्टूबर 2015 को गांधी के 150 वें जन्मदिन तक उनकी संकल्पना को हर ढंग से साकार कर सकें।

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