loksabhaनयी दिल्ली,  लोकसभा में विपक्ष ने असहिष्णुता की बढ़ती घटनाओं को देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के लिए खतरनाक करार देते हुए आज कहा कि केंद्र सरकार को ऐसी घटनाओं से सख्ती से निपटने के सकारात्मक प्रयास करने चाहिए।

असहिष्णुता पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए अन्नाद्रमुक के पी. कुमार ने कहा कि देश में बढ़ती असहिष्णुता की घटनाएं भारत के ‘विविधता में एकता’ के चरित्र को नष्ट करने वाली हैं अौर केंद्र सरकार को इस पर अंकुश लगाने के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहिए, ताकि देश की धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान न पहुंचे।
श्री कुमार ने तमिलनाडु में धार्मिक असहिष्णुता के कई अनोखे उदाहरण देते हुए कहा कि पूरे देश में ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि सभी जाति, धर्म और सम्प्रदाय के लोग मिलजुलकर रह सकें।

शिवसेना के गजानन कीर्तिकर ने कहा कि असहिष्णुता पर सदन में चर्चा करने के बजाय इसके लिए सभी को प्रयास करने चाहिए। उन्हाेंने पाकिस्तानी खिलाड़ियों और गायकों के लिए भारत में रेडकार्पेट बिछाये जाने का विरोध करने वालों को असहिष्णु करार देना उचित नहीं है।

श्री कीर्तिकर ने असहिष्णुता के नाम पर साहित्यकारों, लेखकों और कलाकारों द्वारा पुरस्कार वापस किये जाने को अनुचित करार देते हुए कहा कि हिंदू देवी देवताओं का अपमान करने वालों के लिए चुप्पी साधना भी असहिष्णुता से कम नहीं है।

तेलुगुदेशम पार्टी के जयदेव गाला ने कहा कि असहिष्णुता के नाम पर देश में पुरस्कार लौटाये जाने की घटनाएं राजनीति से प्रेरित हैं। उन्होंने विभिन्न दलों द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए धर्मनिरपेक्ष शब्द के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई।