27pic1नयी दिल्ली,  केंद्रीय वित्त मंत्री और राज्यसभा के नेता अरुण जेटली ने समान नागरिक संहिता, असहिष्णुता, धर्मनिरपेक्षता और आतंकवाद पर दोहरे मापदंड की कडी आलोचना करते हुए आज कहा कि संविधान की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए इसका विश्लेषण किया जाना चाहिए।

श्री जेटली ने राज्यसभा में ‘डा. अम्बेडकर की 125वीं जयंती समारोह के भाग के रुप में भारत के संविधान के प्रति प्रतिबद्धता पर चर्चा’ शुरु करते हुए कहा कि संविधान के क्रियान्यवन के 65 वर्ष बीत गए है लेकिन कई ऐसे मुद्दे है जिन पर संविधान की मूल भावना के अनुसार काम नहीं हुआ है।

कांग्रेस का नाम लिए बगैर श्री जेटली ने कहा कि आजादी के बाद ज्यादातर समय में एक ही पार्टी का शासन रहा है। संविधान के क्रियान्यवन में भी इसी पार्टी की भूमिका अधिक रही है। आपातकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मौलिक अधिकारों का निलंबन कर दिया गया और जीवन का अधिकार भी छीन लिया गया था तो कोई किसी को कोई असहिष्णुता नजर नहीं आयी जबकि आज के समय में कोई टेलीविजन पर कुछ बोल देता है तो बवाल मच जाता है।

उन्होंने कहा कि संविधान के लिए संविधान के प्रावधानों के क्रियान्वयन के तरीके को सबसे बडा खतरा बताया और अप्रत्यक्ष रुप से कहा कि आपातकाल के समय में संविधान के किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया गया लेकिन संविधान की मूल भावना को अनदेखा किया गया। श्री जेटली ने आपालकाल का नाम नहीं लिया लेकिन 1933 में जर्मनी में हिटलर की कार्यशैली और तानाशाही का जिक्र किया।