भारत की आजादी और देश विभाजन के साथ ही पाकिस्तान के साथ काश्मीर मसला और सीमाओं का उल्लंघन पाकिस्तान की तरफ से बराबर चला आ रहा है. आज हमें पठानकोट एयरबेस पर पाक आतंकी हमला बहुत बड़ा इसलिए नजर आ रहा है कि वह अभी हाल ही की घटना है. लेकिन अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला संसद भवन पर उस समय हो गया जब वहां सत्र चल रहा था.

पूरी सरकार मौजूद थी और इनके सबके ऊपर वहां पूरी सुरक्षा व्यवस्था तैनात थी. इसके बावजूद 4 आतंकी मय… करार के अंदर जाने से पहले ही सुरक्षा कर्मियों को गोली मारते हुए संसद परिसर में दाखिल हो गये थे. हमने चारों आतंकियों को मार दिया. लेकिन उन्होंने हमारे 11 सुरक्षा कर्मियों को मार दिया.

ऐसे संख्या या स्टेटिक्स की कोई अहमियत नहीं होती. जितनी बड़ी बात यह होती है कि हमला हो गया. इसी तरह की बड़ी घटना मुंबई में समुद्री रास्ते से आकर पाक आतंकी हमला ताज, ओबेराय ट्रीडेन्ट और छत्रपति शिवाजी रेलवे टर्मिनल पर उससे पहले मुंबई की कई लोकल ट्रेनों में एक साथ ब्लास्ट किया गया था.

हमारी सीमाएं न सिर्फ पाकिस्तान से बल्कि 1962 के चीनी हमलों से चीन से लगी सीमाएं भी असुरक्षित हो गयी है. इनके साथ हमारी सीमाओं में लगातार घुसपैठ व हमले होते आ रहे हैं. इनके साथ हमारी सीमाएं उस तरह की नहीं है, जैसे की हमारी सीमा नेपाल के साथ है- जहां दोनों देशों के लोग आसानी से आ-जा सकते है और मुद्रायें भी चलन में है. अमेरिका और कनाडा के बीच अंतरराष्टï्रीय सीमा केवल राजनैतिक है. लोग आसानी से एक-दूसरे के यहों चले जाते है यूरोप के देशों के बीच आपस में साफ्ट बार्डर होती है.

देश विभाजन के बाद ऐसी ही साफ्ट बार्डर हिंदुस्तान व पाकिस्तान के बीच होनी चाहिए थी. अभी भी दोनों देशों के बीच मुसलमान आबादी के विभाजित परिवार हैं. भारत में मुस्लिम आबादी पाकिस्तान से ज्यादा है. यह इस बात का सबूत होना चाहिए कि विभाजन के बाद भी विभाजन असफल रहा. लेकिन पाकिस्तान के आतंकी इस भरोसे से आते हैं कि उन्हें यहां ‘रेडीमेड सपोर्ट’ मिल जायेगा.

अब तो काश्मीर में खुले आम पाकिस्तान व इस्लामी स्टेट के झंडे व नारे लहराये जाने लगे हैं. वहां हुर्रियत व जमात जैसे संगठन भारत के पाकिस्तान के उच्चायुक्त को अपना रहनुमा मानते हैं. मध्यप्रदेश में सिमी जैसे देशद्रोही संगठन सक्रिय है. इसके सरगना ने यह तक कह दिया कि जमातों की तकरीरें सुनने के बाद कौन भारत से मोहब्बत कर सकता है.

इस समय देश में बाहरी असुुरक्षा के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा को भी भारी खतरा बना हुआ है. हर वक्त यह कहने से न तो अभी तक कुछ हुआ है और न ही आगे कुछ होने की उम्मीद है कि पाकिस्तान भारत में घुसपैठ व आतंकी हमले रोके. यह हमारे लिये आंतरिक सुरक्षा का प्रश्न ज्यादा है.

भारत में विश्व की चौथे नंबर की आर्मी है. इसी के समकक्ष वायुसेना व नौसेना भी है. सीमा सुरक्षा बल (बी.एस.एफ.) भारत-तिब्बत बार्डर पुलिस और सीमावर्ती राज्यों में भी सश पुलिस मौजूद है. हमें अपनी सीमाओं को खुद ही आंतरिक सुरक्षा बढ़ाकर अपनी सुरक्षा सुरक्षित करनी होगी. देश में दुश्मनों के मददगारों के लिए जेल बिल्कुल नाकाफी है. उन्हें मृत्युदंड ही देना होगा. अन्यथा वे खुद ही यहां लोगों को मृत्युदंड देते जायेंगे.

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