सारे संसार में किसी भी अन्य देश में प्रवेश पाने के लिए आमतौर पर तस्कर, अपराधी व अवैध प्रवासी जाली पासपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं. इसके लिए अपराधी गेंगों का उच्च प्रिंटिंग तकनीक जानने वाला एक भारी अवैध व काली कमाई का धंधा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चलता है. अब दुनिया में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल आतंकी संगठन करने लगे हैं. हर राष्ट्र को इसके लिए कठोर व सतर्क कदम उठाने पड़ते हैं. भारत में कोकीन व अफीम के तस्कर तथा आतंकवादी पाकिस्तान, बंगलादेश, नेपाल के रास्ते अधिकांश आतंकी व अपराधी आते रहते हैं. अभी तक जितने भी आतंकी पकड़े गए वे जाली पासपोर्ट लिए हुए थे. हाल ही में दिल्ली में थोक में जाली या चुराये गए पासपोर्ट जब्त किये गये हैं. इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क अधिकारियों ने एक बैग जब्त किया जिसमें कुछ भारतीयों के पासपोर्ट सहित 100 से ज्यादा पासपोर्ट हैं. यह बेग तुर्की एयरलाइंस से आया था.

ऐसा भी अनुमान लग रहा है कि इन लोगों के गैंग के कुछ लोग जिनके पास भारत के पासपोर्ट होते हैं या अन्य भारतीयों से उनके पासपोर्ट ये लोग लेकर अपने पास रख लेते हैं, उन्हें फिर से वापस भारत लाया जाता है और उसमें जाली फेर बदल कर उन्हें फिर से नये लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. अभी जो पासपोर्ट भारी मात्रा में पकड़े गए हैं उससे यह अंदाजा हो ही जाता है ऐसा खतरनाक धंधा जो भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए भारी खतरा भी है, चलता आ रहा है. जाली पासपोर्ट अब आतंकियों का दस्तावेज नहीं बल्कि घातक हथियार बन गए हैं. तुर्की से इन्हें लाया गया है जिससे यह अनुमान भी होता है कि खाड़ी देशों में इनका केंद्र है जिसमें तस्करों के अलावा आतंक के अपराधी लिप्त हैं. भारत का पश्चिमी, दक्षिणी व पूर्वी तट समुद्री सीमा की वजह से निर्धारित व खुला हुआ है. पूर्वोत्तर और उत्तर की भूमि सीमा पर 5 राष्ट्र पाकिस्तान, नेपाल, चीन, बंगला देश व म्यांमार से भारत की सीमा लगती है.

भोपाल शहर में डकैती डालने वाले कई अपराधी बंगला देश से आए थे और वारदात के बाद वहीं लौट जाते हैं. बंगला देश व पाकिस्तान से आतंकवादी भारत में लगातार घुसपैठ कर रहे हैं. इन लोगों का हमेशा चलते रहने वाला एक काम भारत में शत्रु व पड़ोसी राष्ट्रों में छपे भारत में जाली नोटों को चलाना है. भारत में 500 रुपये के नोट लगभग नकली होने से अविश्वसनीय होता जा रहा है. हजार के जाली नोट भी प्रसारित कर दिये गये हैं. इनसे भारत की अर्थव्यवस्था पर भी भारी आघात हो रहा है. अंदरूनी व अंतर्राष्ट्रीय हवाई सेवाओं में बड़ी तेजी से भारी विस्तार हो रहा है. हमें अपनी आंतरिक सुरक्षा के लिए जाली पासपोर्ट व जाली नोटों के खतरों से सतर्कता बढ़ानी होगी.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

Related Posts: