देश इस्लामिक उन्माद व नक्सल हिंसा के आतंकों के अलावा राजनैतिक दलों की रैलियां और आंदोलन भी देश में सबसे तेज बढ़ता व छाया हुआ आतंक है. अब भारत के राजनैतिक दल और राजनेता भी आतंकवादी है.

अभी हरियाणा में जाट आरक्षण की मांग पर जो व्यापक हिंसा, लूटमार, तोडफ़ोड़ की गयी वह आरक्षण और राजनीति की आड़ लेकर बहुत ही सुनियोजित तरीके से दुकानों को लूटने का अभियान था. आरक्षण की मांग केवल उसे ढाकने…. वाला आरक्षण था. मूल उद्देश्य लूट मार करना था.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरक्षण की मांग हरियाणा व केंद्र सरकारों से है. उसमें लोगों की दुकानों को क्यों लूटा और जलाया गया. संविधान द्वारा प्रदत्त मूलभूत अधिकारों से लोगों को संपत्ति व अपना जीवन यापन कार्यकलाप करने का मूलभूत आधार है. लेकिन लगभग हमेशा से यह पार्टियां ‘बंदÓ के जरिये तय करती है कि दुकानदार अपनी दुकानें-धंधा बंद रखे, अन्यथा उन्हें मारा पीटा व लूट जायेगा और यह होता भी है. हरियाणा में लगभग 40 हजार करोड़ का नुकसान जाट हिंसा में हुआ है. जाट अधिकांश संपन्न किसान और विकसित जाति के है. जो आरक्षण के पात्र ही नहीं है. सुप्रीम कोर्ट भी यह निर्णय दे चुका है. हरियाणा में जाट आंदोलन शुरू होते ही जाटों ने दुकानों की लूटमार कर डाली और उसे आरक्षण आक्रोश दर्शाया है.

राज्य के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टïर का यह कहना कि दुकानें लूटने व जलाने व सामान लूटने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी, उनसे हर्जाना लिया जायेगा और कार्यवाही भी होगी- महज बकवास के और कुछ नहीं है. जब ऐसे लोग पकड़े ही नहीं गये उन्होंने आतंक से बाजारों पर कब्जा कर घंटों तक उनका सामान लूटकर ले जाते रहे, वहां उनके सिवाय सभी भाग खड़े हुए- कोई गवाह, सबूत व उनकी शिनाख्त तक नहीं है- तब मुख्यमंत्री किन पर कार्यवाही व वसूली करेंगे. यदि वे सरकारें साहस दिखाएं और संसद में विशेष कानून बनायें तो यह किया जाना चाहिए जाट आरक्षण के जो ज्ञात नेता हैं और सरकार से वार्ता कर रहे हैं उन्हें सहारा के सुब्रत राय की तरह तब तक जेल में रखा जाए, उन पर और हरियाणा के सभी जाटों पर सामूहिक जुर्माना लगाया जाए जब तक रेलों और आम आदमी को हुआ नुकसान जो लगभग 40 हजार करोड़ रुपये है वह वसूल न हो जाए.

एक अन्य आन्दोलन के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने भी यही कहा है कि ऐसे आंदोलन को चलाने वाले संगठनों व राजनैतिक दलों से इसका हर्जाना वसूला जाए. सरकार यह भी कानून बनाकर निर्धारित करे कि आन्दोलनों का क्या रूप व तरीका होगा. रैलियों के नाम पर रेलों पर कब्जा कर मुसाफिर को परेशान व उतारा जाता है. रैलियों की आड़ में तस्कर अवैध ड्रग का भी बड़े पैमाने पर अवैध धंधा कर जाते हैं.
हरियाणा के जाटों ने जिस आतंक से हरियाणा को लूटा है उसकी एक सजा तो यह फौरन ही उन्हें दी जानी चाहिए कि उनसे न तो कोई बात आरक्षण के मुद्दे पर होगी और न ही उन्हें देश में कहीं भी किसी भी तरह आरक्षण दिया जायेगा. यदि केंद्र की मोदी और हरियाणा में उन्हीं की भाजपा की खट्टïर यह नहीं करती तो सरकार को हट जाना चाहिए.

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