15pic1नई दिल्ली,   इजरायल के प्रोफेसर एम लितवाक ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के बढ़ते कदम और दहशतगर्दी के उसके तरीकों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि आईएस की समस्या से निपटने के लिए मुसलमानों की ओर से अभियान चलाने की आवश्यकता है.

तेल अवीव यूनीवर्सिटी में पश्चिम एशिया के विषेशज्ञ डॉ़. लितवाक जामिया मिलिया इस्लामिया में वैश्विक परिपेक्ष्य में धार्मिक कट्टरवादिता विषय पर एक सप्ताह के पाठ्यक्रम के लिए दिल्ली में हैं. उन्होंने आज यूनीवार्ता से कहा कि आईएस की समस्या के समाधान में लंबा वक्त लग सकता है और इससे दो उपायों से निपटा जा सकता है.

उन्होने कहा आईएस की समस्या से एक तो सेना के माध्यम से निपटा जा सकता है दूसरा मुसलमानों द्वारा एक अभियान की शुरुआत करके इन पर काबू पाया जा सकता है. मुसलमानों के अभियान से यह संदेश जाएगा कि समस्याओं के समाधान के लिए हथियार से बेहतर तरीके हैं.

धार्मिक कट्टरवादिता के कारकों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि बेहद आर्थिक तंगी और निराशा में डूबे युवक ऐसी नकारात्मक और घातक शक्तियों का आसानी से शिकार बन रहे हैं. ऐसे संगठन उन्हें विश्वास दिलाते हैं कि उनके पास एक जादूई फॉर्मूला है जो उनकी सभी समस्याओं का समाधान कर देगी.
उन्होंने कहा ऐसी ताकतें हतोत्साहित और कुंठाग्रस्त युवकों को यह भी विश्वास दिलाती है कि उनकी संस्कृति को पश्चिमी ताकतें अपमानित कर रहीं हैं और उनका धर्म उनकी सभी दुखों एवं समस्याओं से मुक्ति दिलाएगा.

पश्चिम एशिया में शिया-सुन्नी समस्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह सबसे गंभीर समस्या है. किसी भी युद्ध की तुलना में शिया-सुन्नी के आपसी संघर्ष में सर्वाधिक मौतें हुई हैं. एक बार जब उन्हें यह समझ में आ जायेगा कि उनकी समस्या का निदान हथियार से नहीं हो सकता तो वे अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए राजनीतिक समाधान की तरफ रूख करेंगे.

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