नई दिल्ली.भारत में स्टार्टअप्स कंपनियों के तेजी से फैलने का श्रेय उनकी कार्यशैली को जाता है. स्टार्टअप्स कंपनियां तुरंत किफायती दरों पर डिलिवरी, ऐक्शन के लिए अपनी पहचान बना चुकी हैं. इसके अलावा इन स्टार्ट अप्स कंपनियों ने बेस्ट टैलंट को अपनी ओर खींचने के लिए उनको आकर्षक सैलरी पैकेज के साथ-साथ बहुत-सी सुविधाएं भी दी हैं.

इसका परिणाम यह हुआ कि उभरती चुनौतियों के कारण दिग्गज आईटी कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ रेट 2011-12 से आधे से भी कम हो गई है. इस समस्या से निपटने के लिए दिग्गज आईटी कंपनियों ने अपनी कार्यशैली और एंप्लॉयीज ट्रीटमेंट में बदलाव लाना शुरू कर दिया है. विप्रो ने किसी भी समस्या के तुरंत हल के लिए एक कमांडो फोर्स यूनिट का गठन किया है.

इसके अलावा फर्जी और असली क्लायंट की समस्याओं के समाधान के लिए कंपनी ने गेमिंग जैसे ट्रेनिंग सेशन और हैकाथन का भी आयोजन किया है. भारत की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित आईटी कंपनियों जैसे इंफोसिस, विप्रो आदि ने स्टार्ट अप्स कंपनियों से मिल रही चुनौतियों का सामना करने के लिए नए कदम उठाए हैं. इन आईटी कंपनियों ने अपना ध्यान दो मोर्चों पर केंद्रित किया है. पहला मोर्चा तो ग्राहकों को तुरंत सेवा और किसी तरह की शिकायत के तुरंत निपटारा को लेकर है और दूसरा मोर्चा अपने एंप्लॉयीज को संतुष्ट करना है. पिछले कुछ सालों में स्टार्ट अप्स कंपनियां बहुत तेजी से बढ़ी हैं.