1946 के बाद पहली बार आईसीजे में नहीं होगा ब्रिटेन का कोई जज
आखिरी क्षणों में हटा ब्रिटेन

संयुक्त राष्ट्र, इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस का गठन 1946 में हुआ था. उस दौर में ब्रिटेन दुनिया की बड़ी ताकत था और तब से आज तक आईसीजे में उसका कोई न कोई जज जरूर रहता था. लेकिन 1946 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में ब्रिटेन की सीट नहीं होगी.

वहीं, भारत के दलवीर भंडारी इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के जज के तौर पर दोबारा चुन लिए गए हैं. जज की आखिरी सीट के लिए भंडारी और ब्रिटेन के दावेदार के बीच मुकाबला था लेकिन आखिरी क्षणों में ब्रिटेन ने अपने उम्मीदवार को चुनाव से हटा लिया.

भंडारी को जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी है. इस बीच आईसीजे में भारत की जीत पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्विटर पर खुशी जताई. कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि यूरोपियन यूनियन से ब्रिटेन के अलग हटने के चलते उसकी ताकत कम

हुई और इसी के चलते उसे चुनाव से अपने उम्मीदवार को हटाना पड़ा. नीदरलैंड के हेग स्थित संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी न्यायिक संस्था आईसीजे में 15 जज होते हैं.

यह संस्था दो या उससे अधिक देशों के बीच के विवादों के निपटारे करने का काम करती है. हर तीन साल बाद आईसीजे में 5 जजों का चुनाव होता है. इन जजों का कार्यकाल 9 साल का होता है.

चार राउंड की वोटिंग के बाद फ्रांस के रूनी अब्राहम, सोमालिया के अब्दुलकावी अहमद युसूफ, ब्राजील के एंटोनियो अगुस्टो कैंकाडो, लेबनान के नवाफ सलाम को गुरुवार को आईसीजे के जज के तौर पर चुन लिया गया. इन चारों को संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद में आसानी से बहुमत मिल गया था.

इसके बाद आखिरी बची सीट पर भारत और ब्रिटेन के बीच कड़ा मुकाबला था. ब्रिटेन के क्रिस्टोफर ग्रीनवुड और भारत के दलवीर भंडारी दोबारा निर्वाचन के लिए मुकाबले में थे. 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में ग्रीनवुड को सुरक्षा परिषद में बहुमत मिलता दिख रहा था, जबकि 193 देशों की आम महासभा में भंडारी को समर्थन था.

लेकिन, अंत में सुरक्षा परिषद में भी भंडारी को सपॉर्ट मिला, जबकि कमजोर समर्थन के चलते ब्रिटेन को ग्रीनवुड्स की उम्मीदवारी वापस लेनी पड़ी. इसके चलते सोमवार को भंडारी आसानी से महासभा और परिषद द्वारा चुन लिए गए.

आईसीजे से पहली बार बाहर होने पर ब्रिटेन के यूएन ऐंबैसडर मैथ्यू रिक्रॉफ्ट ने कहा, निश्चित तौर पर हमें निराशा हुई है. लेकिन, छह कैंडिडेट्स के बीच निश्चित तौर पर यह कड़ा मुकाबला था. उन्होंने कहा कि युनाइटेड किंगडम की ओर से कोर्ट के काम को पहले की तरह सपॉर्ट मिलता रहेगा.

“जस्टिस दलवीर भंडारी को आईसीजे में दोबारा जज चुने जाने पर बधाई. उनका दोबारा चुना जाना हमारे लिए गर्व का क्षण है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और विदेश मंत्रालय तथा दूतावासों में उनकी पूरी टीम को उनके अथक परिश्रम के लिए बधाई, जिसके कारण भारत आईसीजे में पुन:निर्वाचित हुआ है.”
-नरेन्द्र मोदी के ट्वीट से

Related Posts: