27vd-2गंजबासौदा, सावरकर चौक स्थित राजोरिया मार्केट की रेडीमेड कपड़ा दुकानों में आग लगने से लगभग 10 लाख से अधिक के रेडीमेड कपड़े जलकर खाक हो गये, पांच दुकानों में रेडीमेड कपड़े भर रखे थे। इसी मार्केट में किशोर इलेक्ट्रानिक की पांच दुकानें थीं, जिनका उपयोग दुकान के साथ गोदाम के रूप में किया जाता था, आग की लपटों तथा धुंआ भरने से बिजली के बायर तथा पाइप पिघल गये तथा सामान खराब हो गया, इससे लगभग 5 लाख का नुकसान हुआ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सिंधी कालोनी निवासी घनश्यामदास गोपलानी, अमित तथा दीपू गोपलानी ने सावरकर चौक पर राजोरिया मार्केट में पांच दुकानें किराये पर ले रखी थीं, बिक्री का कारोबार तथा गोदाम मार्केट में बना रखा था, उसी मार्केट में किशोर सिंधी ने पांच दुकानें किराये पर ले रखी थीं, दुकान के साथ गोदामों के रूप में दुकानों का उपयोग किया जा रहा था, दुकानों के ऊपर की मंजिल पर उमंग भोजनालय खुला हुआ है, जिसका जीना इन्हीं दुकानों के बीच से निकला हुआ है, देर रात्रि तक भोजनालय चलता है, लोगों का आना जाना लगा रहता है।

मार्केट की दुकानों से उठा धुआं
रविवार 27 सितम्बर को प्रात: 9 बजे आसपास के दुकानदार अपनी दुकानें खोलने सावरकर चौक पर पहुंचे तो राजोरिया मार्केट की कपड़ा दुकानों से धुआं निकल रहा था, उसी समय विधायक निशंक जैन मंदिर जाने के लिये निकले वहाँ खड़े लोगों ने उन्हें रोका और जानकारी दी, उन्होंने तुरंत फायर बिग्रेड वालों के साथ दुकान मालिकों व पुलिस को सूचना दी। दो फायर बिग्रेड की गाडिय़ों से पानी छोड़ा गया, एक घंटे में आग पर काबू पाया और किसी तरह बगल की इलेक्ट्रॉनिक दुकानों को बचा लिया अन्यथा इन दुकानों में भी आग लग जाती, सभी पांच दुकानों को खोलकर पूरा सामान सड़क पर फेंका ताकि बच सके परंतु रेडीमेड कपड़े तो जलकर खाक हो गये, जो माल बचा है वो जगह-जगह से जल गया है और पानी से खराब हो गया है।

नहीं है बीमा, न कर्ज लिया
गोपलानी बंधुओं ने बताया कि उन्होंने न तो रेडीमेड कपड़ों का बीमा कराया है और न बैंक से कर्ज लिया है, जीवन भर की मेहनत और खून पसीना बहाकर जो कमाया था वो सब जलकर खाक हो गया।

वैशाखिया मार्र्केट से नहीं लिया सबक
बीते वर्ष अम्बेडकर चौक स्थित बैशाखिया कपड़ा मार्केट में भीषण आग लगी थी, जिसमें लाखों का रेडीमेड कपड़ा जलकर खाक हो गया था। इससे दुकानदारों ने सबक नहीं लिया, दुकान के साथ गोदाम होने के कारण अधिक क्षति होती है, नगर में नीचे दुकान ऊपर आवास, पीछे गोदाम एक मकान में सारी व्यवस्था बनाकर रखी जाती है। प्रशासन भी ध्यान नहीं देता, यही सब कारण बनते हैं अधिक क्षति होने के। अगर यही आग रात में लगी होती तो पूरा मार्केट ध्वस्त हो जाता।

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