bpl4भोपाल,   फिल्मों का संगीत बदल रहा है. बदलाव एक अच्छी चीज है. तभी तो हमको कुछ नया सुनने को मिलता है, यह कहना है बॉलीवुड सिंगर शंकर हरिहरन का.

जो संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन और नगर निगम की ओर से आयोजित कार्यक्रम हृदय दृश्यम में अपनी परफार्मेंस देने के लिए रविवार को राजधानी भोपाल पहुंचे. आगे उन्होंने कहा कि संगीत की कोई भाषा नहीं संगीत खुद एक भाषा है संगीत खुद अपने आप में एक भाषा है. रोजा और बॉम्बे के गाने आज की युवा पीढी सुनती है. अच्छा लगता है वह गाने आज भी जिंदा है. बच्चे उन्हें गाते हैं और सुनते हैं. यह एक स्प्रिटफुल फोर्स है. यह यूं कहें कि संगीत को कोई भी काम शिद्दत से करना चाहिए यह गाने उसी का नतीजा है.
तू ही रे…

भारतीय प्ले बैक, भारतीय फ्यूजन संगीत के अग्रदूत पद्मश्री हरिहरन ने अपनी मखमली-नशीली आवाज से भोपाल की फिजाओं में गजलों की मेहफिल से माहौल में रूमानियत भर दिया. हृदय दृश्यम की अंतिम प्रस्तुति के रूप में इकबाल मैदान में शंकर हरिहरन ने अपनी गजलों की खूबसूरत प्रस्तुति दी. जहां सैकड़ों श्रोताओं ने इस शाम का गवाह बने. हजारों की तादाद में गजल गायक शंकर हरिहरन को सुनने पहुंचे लोगों ने गजलों का जमकर लुत्फ लिया. हरिहरन ने अपनी गजलों की शुरुआत ‘तू जो आने को है’ से की. इसके बाद उन्होंने ‘काश ऐसा कोई मंजर होता…’ प्रस्तुति से माहौल खुशनुमा कर दिया। इसके बाद उन्होंने 1947 अर्थ फिल्म का गीत ‘जो पास है मुझे प्यास है धीमी-धीमी…, की मंजे हुए अंदाज में प्रस्तुति दी. इसी कड़ी में उन्होंने रोजा फिल्म की गीत ‘तू ही रे… सुनाकर श्रोताओं को झुमने पर मजबूर कर दिया. शंकर हरिहरन के साथ हारमोनियम पर अखलक हुसैन वारसी, तबले पर शाहदाब रौशन भारतीय, पियानो पर अतूल रानिंगा गिटार पर संजॉय दास और सारंगी पर दिलशाद खान ने संगत दी.

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