हेमंत कटारे मामले पर नेता प्रतिपक्ष ने जाहिर की चिंता,

कहा भाजपा राज में कानून वही पर लागू अलग-अलग

नवभारत न्यूज भोपाल,

पुलिस अधिकारी के माध्यम से जिस तरह षडयंत्र पूर्वक कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे को फंसाने की कोशिश की गई है, वह निश्चित तौर पर भाजपा के चाल-चरित्र और चेहरे की कलई खोलता है. लेकिन ध्यान रखिये यदि इसी तरह चलता रहा तो आज हम निशाने पर हैं, लेकिन कल आप में से कोई होगा.

चिंता के साथ चेतावनी भरे यह लफ्ज हैं नेपा प्रतिपक्ष अजय ङ्क्षसह राहुल के. वह निज निवास पर अटेर विधायक हेमंत कटारे के साथ पत्रकारों से मुखातिब हुये थे.

यहां उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि क्या म.प्र. में दो तरह का कानून चलेगा? जनता और विरोधियों के लिये अलग और भाजपा नेताओं के लिये अलग. क्योंकि यह कैसे हो सकता है कि 302 के अपराधी मंत्री को बचाने के लिये पूरी सरकार के साथ पुलिस के आला अधिकारी नियम के तोड़ बता रहे हैं.

वहीं विपक्षी दल कांग्रेस के विधायक को सरासर झूठे मामले में फंसाने के लिये षडयंत्रपूर्वक पुलिस अफसर का दुरुपयोग किया जा रहा है. यहां उन्होंने आशंका जताई कि जैसे-जैसे विधानसभा के चुनाव नजदीक आयेंगे, वैसे-वैसे भाजपा पुलिस प्रशासन को कब्जे में लेकर कांग्रेस नेताओं पर मामले लादने का प्रयास करेगी.

पूरे माहौल को दूषि बताते हुये उन्होंने कहा कि यह आम जनता को भी सोचना चाहिये कि प्रदेश कहां जा रहा है. यहां बता दें कि बुधवार को अटेर एसडीओपी ने भिण्ड की विशेष न्यायालय में विधायक को एक मामले में आरोपी बनाने का प्रयास किया था.

लेकिन न्यायाधीश योगेश गुप्ता की अदालत ने औपचारिकताओं के अभाव में पुलिस अधिकारी इंद्रवीर सिंह भदौरिया को लताड़ लगाते हुये वापस भेज दिया था.

यह बात अलग है कि मामले को जब मीडिया ने प्रमुखता से उजागर किया तो राज्य शासन ने त्वरित कार्रवाई का हवाला देते हुये संबंधित अधिकारी को एसडीओपी पद से हटाते हुये पुलिस मुख्यालय में पदस्थ करने के आदेश जारी कर दिये हैं.

द्वेषवश की जा रही कार्रवाई : कटारे

अटेर विधायक कटारे ने इस दौरान आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह चौहान, गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह के इशारे पर यह कार्रवाई द्वेषवश की गई है. क्योंकि यह सभी मेरे स्व. पिता सत्यदेव कटारे द्वारा व्यापमं मामला उजागर किये जाने के समय से खुन्नस खाये हुये थे.

इसलिये भी कि उप चुनाव के दौरान भेजे गये इस अधिकारी को रेत के अवैध उत्खनन में लिप्त रहने संबंधी शिकायत के बाद निर्वाचन आयोग ने हटा दिया था. लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद उन्हें फिर पदस्थ कर दिया गया है. बीते दिनों उनको एक टीवी चैनल ने रिश्वत लेते हुये दिखाया था.

इस मामले की भी शिकायत की गई है. लेकिन यह तो मौजूदा समय की घटनाएं हैं मुझे व मेरे व्यक्तियों को लंबे समय से लगातार प्रताडि़त किया जा रहा है, जिसकी विधानसभा के माध्यम से संज्ञान में पहले ही लाया जा चुका है.

Related Posts: