modiसैन जोस (कैलिफोर्निया), 28 सितंबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व के देशों का आह्वान किया कि वे संयुक्त राष्ट्र के 70वें साल में आतंकवाद की लिखित परिभाषा तय करें ताकि अच्छे आतंकवाद और बुरे आतंकवाद के नाम पर इस बुराई को परदे के पीछे से बढ़ावा देने वाले मुल्कों को पहचान स्पष्ट हो सके.

श्री मोदी ने रविवार की शाम अमेरिका के पश्चिमी तट पर अपने आखिरी कार्यक्रम में सैप सेंटर में 18 हज़ार से ज्य़ादा भारतीय समुदाय को संंबोधित करते हुए कहा कि आज विश्व के समक्ष दो सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं – ग्लोबल वार्मिंग और आतंकवाद. उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में इन संकटों पर चर्चा हो रही है. भारत इन चुनौतियों से मुकाबले के लिये पूरी तरह से सज्ज है. उन्होंने कहा कि हमने संयुक्त राष्ट्र पर इस बात का दबाव डाला है कि यह वैश्विक संस्था अपनी 70वीं सालगिरह मना रही है लेकिन आज तक आतंकवाद की परिभाषा तय नहीं कर पायी. अगर परिभाषा तय करने में इतना वक्त लगेगा तो उससे निपटने में कितना वक्त लगेगा. उन्होंने दुनिया के सभी देशों को पत्र लिखे हैं कि आतंकवाद मानवता के सामने एक बड़ा खतरा बन कर खड़ा है. इस पर ठोस कदम उठाने होंगे.

उन्होंने कहा कि वह आशा करते हैं कि संयुक्त राष्ट्र इतनी गंभीर समस्या को टालेगा नहीं. एक बार लिखित स्वरूप में यह तय हो जाये कि आतंकवाद क्या है. अच्छे आतंकवाद और बुरे आतंकवाद की बात नहीं चलेगी. आतंकवाद सिर्फ आतंकवाद है. उन्होंने कहा कि सभी मानवतावादी ताकतों को एक होना पड़ेगा और यह संयुक्त राष्ट्र की जिम्मेदारी है.

दुनिया के सामने यह स्पष्ट होना चाहिये कि कौन आतंकवाद के साथ है और कौन मानवता के साथ है. तस्वीर साफ होनी चाहिये. उन्होंने कहा कि हम उस धरती से आये हैं जो गांधी और बुद्ध की धरती है. मानवता के लिये 21वीं सदी को रक्तरंजित होने और उसे कलंकित होने से बचाना होगा. उन्होंने कहा कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को ताल ठोंक कर यह बताया है और कल भी बतायेंगे. सैप सेंटर में इस मौके पर अमेरिकी संसद के दोनों सदनों के कई सांसद एवं दोनों प्रमुख पार्टियों के नेता मौजूद थे.