आधार कार्ड को हर बात से जोडक़र उससे लिंक करने को कहा जा रहा है. इसमें बैंक से लेकर गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों के राशन कार्ड तक शामिल किये जा चुके हैं. अभी तक आधार की जो प्रणाली रही उसमें लोगों के उंगलियों के निशान से उस व्यक्ति का सत्यापन होता था.

लेकिन ‘आधार’ प्रणाली इतनी दोषपूर्ण रही कि लोगों को आधार से निर्धारित सेवाएं जैसे परीक्षा में प्रवेश पत्र, रेलवे टिकिट आदि सभी जरूरी जरूरतों के समय उन्हें वह सेवा तो दी नहीं गयी और उल्टे यह बताया जाता कि उनकी फिंगर प्रिंट में बदलाव आ चुका है. वह उनके आधार कार्ड को फिर से अपडेट करायें.

‘आधार’ के अलावा अन्य जो भी कार्ड होते हैं उनमें एक तारीख दी जाती है कि वे उसे उस समय पर रिन्यू करा लें. लेकिन के ‘आधार’ फिंगर प्रिंट को सदियों से चले आ रहे ‘निशान अंगूठा’ की तरह स्थाई व अटल माना गया. लेकिन उंगलियों के बारे में ‘आधार’ में ऐसा नहीं निकला और लोगों को ‘आधार’ के निराधार हो जाने से बेहद परेशानियां हो रही हैं.

उन्हें यह पता ही नहीं चलता कि कब उनके फिंगर प्रिंट बदल गये हैं और ‘आधार’ के कितने दिनों में अपडेट करना होगा. लेकिन ‘आधार’ के बारे में शासकीय तौर पर यही कहा गया कि उसे रिन्यू नहीं कराया जाता वह स्थाई है. लेकिन ‘आधार’ की जमीनी हकीकत यह हो रही है कि फिंगर प्रिंट का मिलान नहीं हो रहा है. गरीब लोगों को इस आधार पर कि ‘आधार’ मेच नहीं हो रहा अनाज तक नहीं दिया गया.

बीच में ‘आधार’ के बारे में यह भी एक मुसीबत आ गई कि ‘आधार’ के जरिये जालसाजों ने लोगों के बारे में जानकारियां हेक कर उसके आधार पर लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा दिया. सरकार ने यह जो कुछ भी कहा कि आधार से लोगों का डाटा हेक नहीं हो सकता है, यह महज झूठा भरोसा व झूठी दिलासा दी थी.लोगों का डाटा हेक हुआ है और उनकी निजी जानकारी लेकर उन्हें आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है.

यदि ‘आधार’ में सब कुछ सही था तो फिर अब ‘आधार’ का आधार फिंगर प्रिंट की जगह व्यक्ति का ‘चेहरा’ क्यों बनाया जा रहा है. आगामी एक जुलाई से ‘आधार’ का आधार ‘चेहरा’ होगा. अब यह बेतुकी दिलासा दी जा रही है कि उन्हीं के फिंगर प्रिंट बदले जो हाथों सें मेहनत का काम करने थे. लेकिन सच्चाई यह है कि आमतौर पर सभी को यह परेशानी आयी.

अब ‘आधार’ नाम ‘वर्चअल आई डी’ (वास्तव में पहचान पत्र) हो रहा है जो 16 अंकों का होगा. इसके तहत 1 मार्च सें ‘वर्चअल आई डी’ की वेबसाइट में जनरेट कर सिम वेरीफिकेशन से लेकर विभिन्न जरूरतों के लिये इस्तेमाल किया जा सकेगा.

लोगों को ‘डिजीटल इंडिया’ और ‘ऑनलाइन’ के नशे में परेशान किया जा रहा है. रसोई गैस की ऑनलाईन बुकिंग से सबसे ज्यादा परेशानी हो गयी है. ऑनलाईन का नंबर लगाने पर व्यक्ति को 8-10 नंबरों में यहां लगाओ कहते हुए घुमाया जाता है और व्यक्ति को बाद में पता चलता है कि गैस की बुकिंग ही दर्ज नहीं हुई थी.

अब गैस बुकिंग ग्राहक की सुविधा के लिये सिर्फ एक नंबर लगाने पर ही उसके ग्राहक नंबर से उसकी बुकिंग हो जाना चाहिए. ‘आधार कार्ड’ और ऑनलाईन सुविधा के नाम पर लोगों के लिए भारी असुविधा
बन गये हैं.

पहले की सरकारों ने राष्ट्रीयकरण के नाम पर सरकारी उपक्रमों की भरमार कर ली और आज लगभग सभी ‘एयर इंडिया’ भी घाटे में जाकर सरकार विनिवेश के नाम पर उसका फिर निजीकरण कर रही है. यही हाल डिजीटल इंडिया और ऑनलाईन का होने जा रहा है जब ये भरभरा के बैठ जायेंगे तब इन्हें खत्म किया जायेगा.

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