यूजर्स की प्राइवेसी के लिए नया टू-लेयर सिक्यॉरिटी सिस्टम

खास बातें

  • 16 नंबर की वर्चुअल आईडी लेगी आधार नंबर की जगह
  • केवाईसी के लिए एजेंसियां को नहीं मिलेगा आधार नंबर
  • एजेंसियां टोकनों के जरिए यूजर्स की करेंगी पहचान
  • पहले से ज्यादा सुरक्षित होगा ऑथेंटिकेशन
  • ऑथेंटिकेशन के वक्त नहीं देना पड़ेगा आधार नंबर
  • जरूरत के वक्त तत्काल जेनरेट होगा वर्चुअल आईडी
  • 1 जून तक सभी एजेंसियां अपनाएंगी नए सिस्टम

नई दिल्ली,

आधार डेटाबेस में लीक की न्यूज रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) ने बुधवार को नया टू-लेयर सेफ्टी सिस्टम- वर्चुअल आईडी बनाने और लिमिटेड केवाईसी जारी किया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इन दोनों उपायों से आधार यूजर्स की प्रिवेसी पहले से और पुख्ता हो जाएगी.

वर्चुअल आईडी की वजह से किसी भी आधार नंबर के ऑथेंटिकेशन के वक्त आपको अपने आधार नंबर को शेयर करने की जरूरत खत्म हो जाएगी. इस तरह आधार ऑथेंटिकेशन पहले से ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी. वर्चुअल आईडी एक 16 अंकों वाली संख्या होगी, जो ऑथेंटिकेशन के लिए आधार नंबर की जगह इस्तेमाल होगी. यह जरूरत के वक्त कंप्यूटर द्वारा तत्काल जेनरेट होगी. सभी एजेंसियां 1 जून तक इस नए सिस्टम को अपनाएंगी.

थिंकटैंक ने कहा कि आधार के सामने कई लघु और दीर्घकालिक चुनौतियां हैं. उसके मुताबिक डेटा की चोरी रोकना सबसे बड़ी चुनौती है. मुनाफाखोर व्यवसाय जगत इस डेटा तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता है.

रिसर्च नोट में कहा गया है कि आज का दौर व्यवसायों के बीच कड़ी प्रतिद्वंद्विता का है जिसमें नैतिक सीमाओं का तेजी से उल्लंघन हो रहा है. रिसर्च नोट में कहा गया है कि आधार डेटा के संभावित व्यवसायिक दुरुपयोग से बड़ी चिंता इसके आसानी से लीक होने की है. नोट के मुताबिक आधार डेटा पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और साइबर क्रिमिनल इसमें सेंध लगा सकते हैं.

“लिमिटेड केवाईसी सुविधा आधार यूजर्स के लिए नहीं बल्कि एजेंसियों के लिए है. एजेंसियां केवाईसी के लिए आपका आधार डिटेल लेती हैं और उसे स्टोर करती हैं. लिमिटेड केवाईसी सुविधा के बाद अब एजेंसियां आपके आधार नंबर को स्टोर नहीं कर सकेंगी.

इस सुविधा के तहत एजेंसियों को बिना आपके आधार नंबर पर निर्भर हुए अपना खुद का केवाईसी करने की इजाजत होगी. एजेंसियां टोकनों के जरिए यूजर्स की पहचान करेंगी. केवाईसी के लिए आधार की जरूरत कम होने पर उन एजेंसियों की तादाद भी घट जाएगी जिनके पास आपके आधार की डिटेल होगी.”

बेघरों का कैसे बनेगा आधार कार्ड: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बेघर लोगों को सोशल वेलफेयर स्कीम का लाभ नहीं मिलने पर चिंता जताते हुए पूछा कि बिना स्थायी पता के उन बेघरों को आधार कार्ड कैसे मिलेगा? जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने देश भर में शहरी बेघरों को बसेरे उपलब्ध कराने के लिये दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की.

कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जानना चाहा कि शहरी बेघरों के आधार कार्ड कैसे बन रहे हैं. राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पीठ ने सवाल किया, यदि कोई व्यक्ति बेघर है तो आधार कार्ड में उसे कैसे वर्णित किया जाता है.

“यह कदम ऐसे वक्त उठाया गया है जब एक दिन पहले ही आरबीआई के सहयोग से तैयार किए रिसर्च नोट में आधार को लेकर कुछ गंभीर चिताएं जाहिर की गई हैं. आरबीआई से जुड़े एक थिंकटैंक ने कहा है कि मौजूदा स्वरूप में आधार साइबर अपराधियों के लिए बहुत ही आसान टारगेट है.”

 

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