मध्यप्रदेश को नई राज्यपाल के रूप में श्रीमती आनन्दी बेन संवैधानिक के अलावा सक्रिय राज्यपाल भी मिल गई है. अभी तक यह मान्यता रही है कि वे केवल संवैधानिक प्रमुख हैं और राज्यपाल उसी समय सक्रिय भूमिका में आते हैं जब राज्य में बहुमत-अल्पमत के विवाद ही संवैधानिक दायित्वों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं और राष्ट्रपति शासन में सक्रिय अवसर हो जाते हैं फिर भी शासन एडवाइजर ही चलाते हैं.

ब्रिटिश काल में गवर्नर औपनिवेशिक व्यवस्था में सभी अर्थों में प्रत्यक्ष रूप से शासन करता था. लेकिन भारत के संवैधानिक ढांचे में उन्हें सक्रिय होने के अवसर कम और निष्क्रिय रहने का अवसर या समय ज्यादा मिलता है. लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि श्रीमती आनन्दी बेन सक्रिय राज्यपाल की भूमिका स्थापित कर रही हैं. शपथ ग्रहण के तुरन्त बाद वे एक प्राथमिक स्कूल में गईं.

26 जनवरी को लाल परेड ग्राउंड पर उन्होंने गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण व राज्य को उद्बोधन भी दिया. राज्च की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जनता व सरकार के साथ खड़े होने से राज्य तरक्की के मुकाम पर पहुंचा है. राज्य के सुशासन व बेहतर वित्तीय प्रबंधन का ही नतीजा है कि मध्यप्रदेश की विकास दर देश की औसत दर से भी अधिक है.

राज्यपाल ने गणतंत्र दिवस के दूसरे दिन राजभवन में अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्र-छात्राओं से भेंट की. उन्होंने घोषणा कर दी कि राजभवन बच्चों के लिये हमेशा खुला रहेगा और अधिकारियों को इस संबंध में उसी वक्त निर्देश दे दिया.

लोकतंत्र और गणतंत्र में राज्यपाल ‘संवैधानिक रुतबे’ में राजभवन में ही बैठे रहे यह भी उचित नहीं लगता. मंत्रिमंडल तो शासन चलाता ही है राज्यपाल भी यदि स्कूलों, बाल गृह, महिला गृहों, शासकीय कार्यालय में निरीक्षण-परीक्षण की भूमिका निभायें तो शासन में गति और संपर्क से नयी विधा व
सक्रियता आयेगी.

संभव है कि श्रीमती आनंदी बेन की राज्यपाल की भूमिका को नयी परिभाषा देकर उन्हें हमेशा सक्रिय होने की परंपरा का निर्माण करें. हो सकता है कि नयी राज्यपाल पूरे प्रदेश में सभी जिलों का दौरा करके राज्य सेे अवगत होना चाहेंऔर राज्य के लोगों को एक सक्रिय गनर्वर के दर्शन हो.

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