bmobay_high_courtमुंबई,  मुंबई हाई कोर्ट ने एक अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, पढ़ी-लिखी, आत्मनिर्भर लड़कियां परिपक्व होती हैं.

पार्टनर के साथ शारीरिक संबंध बनाने से पहले वह ऐसे संबंधों से होने वाली परेशानियों से वाकिफ होती हैं. इस तरह के केस को रेप नहीं माना जा सकता है.

जस्टिस मृदुला भटकर ने सोलापुर के 24 साल के युवक की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. युवक का कहना है कि वह 24 साल की महिला के साथ संबंध में था. ब्रेकअप के बाद महिला ने गोरेगांव के एक थाने में उसके खिलाफ रेप, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश की शिकायत करते हुए एफआईआर दर्ज करा दी.

हालांकि महिला के वकील अनिकेत निकम का कहना है, दोनों की मुलाकात मार्च 2015 में हुई थी और फिर दोनों को प्यार हो गया.

आरोपी युवक ने पहले शादी का वादा किया था और शारीरिक संबंध बनाए. मई में जब युवती गर्भवती हुईं तो आरोपी ने दबाव बनाकर गर्भपात करवाया और कुछ दिन बाद सभी संबंध खत्म कर लिए.

हालांकि कथित पीडि़ता के वकील की दलील पर कोर्ट ने काफी सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, हमारी समझ से यह रिश्ता आपसी सहमति से बना था इसलिए आरोपी को जमानत दी जाती है. जस्टिस भटकर ने टिप्पणी में यह भी कहा, मैं समझती हूं कि हमारे समाज की कुछ पाबंदियां हैं.

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