चुनाव आयोग का आप को बड़ा झटका, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास भेजी सूची

  • लाभ के पद का मामला
  • चुनाव आयोग में आप के किसी विधायक की गवाही नहीं हुई

नई दिल्ली,

चुनाव आयोग ने लाभ के पद मामले में दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों की अयोग्य घोषित किया है. आयोग अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेज दी है.

अब सबकी नजरें राष्ट्रपति पर हैं, जो इस मामले पर अंतिम मुहर लगाएंगे. वह अगर आयोग की अनुशंसा पर इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने का आदेश जारी करते हैं, तो दिल्ली में इन सीटों पर दोबारा चुनाव की नौबत आ सकती है.

हालांकि यह तय है कि 20 विधायकों की सदस्यता चले जाने की स्थिति में भी 67 सीटों के बंपर बहुमत के साथ सत्ता में आई केजरीवाल सरकार बची रहेगी. शुक्रवार को चुनाव आयोग की टॉप मीटिंग के बाद इस बारे में राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजने का फैसला हुआ. मामले की जांच राष्ट्रपति के निर्देश पर ही हो रही थी. इस मामले में पहले 21 विधायकों की संख्या थी, लेकिन जरनैल सिंह पहले ही पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं.

यह है पूरा मामला

दिल्ली सरकार ने मार्च, 2015 में आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों को संसदीय सचिव बना दिया था. इसको लेकर प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी और कांग्रेस ने सवाल उठाए थे. इसके खिलाफ प्रशांत पटेल नाम के शख्स ने राष्ट्रपति के पास याचिका लगाकर आरोप लगाया था कि ये 21 विधायक लाभ के पद पर हैं, इसलिए इनकी सदस्यता रद होनी चाहिए.

दिल्ली सरकार ने दिल्ली असेंबली रिमूवल ऑफ डिस्क्वॉलिफिकेशन ऐक्ट-1997 में संशोधन किया था. इस विधेयक का मकसद संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से छूट दिलाना था, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नामंजूर कर दिया था.

हाई कोर्ट का अंतरिम राहत देने से इनकार

  • अगली सुनवाई सोमवार को

चुनाव आयोग द्वारा आम आदमी पार्टी के 20 सदस्यों की सदस्यता रद्द करने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट आप को राहत देने से इनकार कर दिया है. के 6 विधायक चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचे थे. मामले की त्वरित सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि वह आप के तथ्यों से संतुष्ट नहीं है और इस आधार पर फौरी राहत नहीं दी जा सकती है. कोर्ट ने साथ ही आयोग से आपके आरोपों पर जवाब भी मांगा है. मामले की अगली सुनवाई अब सोमवार को फिर होगी.

मोदी का कर्ज उतारने की कोशिश कर रहे जोति

फैसला आप के खिलाफ साजिश है. चुनाव आयोग में आप के किसी विधायक की गवाही नहीं हुई है. मुख्य चुनाव आयुक्त ए.के. जोति रिटायर होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी का कर्ज उतारने की कोशिश कर रहे हैं.
-सौरभ भारद्वाज, आप नेता

नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें केजरी: भाजपा

केजरीवाल नैतिक आधार पर इस्तीफा दें. जिस पार्टी ने अन्ना हजारे के साथ मिलकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन किया अब उससे ज्यादा भ्रष्ट कोई नहीं है. क्या उनके पास नैतिकता है कि वे सरकार में बने रहें? नैतिकता से केजरीवाल का दूर-दूर तक संबंध नहीं है. आप की सच्चाई जनता के सामने आ चुकी है.
-संबित पात्रा,बीजेपी प्रवक्ता

केजरीवाल तुरंत इस्तीफा दें: कांग्रेस

चुनाव आयोग द्वारा लाभ के पद के मामले में आप के विधायकों को अयोग्य ठहराये जाने के मद्देनजर राजनीति में शुचिता की बात करने वाले केजरीवाल को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए. केजरीवाल के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस 22 जनवरी से इन विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में प्रदर्शन शुरू करेगी.
-अजय माकन, कांग्रेस प्रवक्ता दिल्ली

सोनिया, जया को छोडऩी पड़ी थी संसद सदस्यता

ऐसा नहीं है कि जनप्रतिनिधियों पर इस तरह की कोई पहली कार्रवाई हुई है. यूपीए-1 के समय 2006 में लाभ के पद का विवाद खड़ा होने की वजह से सोनिया गांधी को लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर रायबरेली से दोबारा चुनाव लडऩा पड़ा था. सांसद होने के साथ सोनिया को राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का चेयरमैन बनाए जाने से लाभ के पद का मामला बन गया था.

इसी तरह 2006 में ही जया बच्चन पर भी आरोप लगा कि वह राज्यसभा सांसद होने के साथ-साथ यूपी फिल्म विकास निगम की चेयरमैन भी हैं. इसे लाभ का पद माना गया और चुनाव आयोग्य ने जया बच्चन को अयोग्य ठहरा दिया. जया बच्चन ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. यहां भी उन्हें राहत नहीं मिली.

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