मांगें पूरी करने के लिए 15 अप्रैल तक अल्टीमेटम 

भोपाल,

चुनावी साल में सरकार हर वर्ग को खुश करने लगातार बड़े फैसले ले रही है. शासकीय कर्मचारी, किसान के बाद सरकार ने साधु संतों को भी खुश करने का फैसला लिया है, लेकिन इस फैसले का विरोध भी हो रहा है. प्रदेश के पांच संतों को सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा देकर उन्हें खुश कर दिया है, लेकिन इस फैसले से सियासत गरमाई हुई है.

प्रदेश के पुजारी व संतों का कहना था कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है. मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी उनकी मांगों को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है. दोपहर के समय संत-पुजारी मुख्यमंत्री निवास की ओर ज्ञापन देने के लिए रवाना हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें भोपाल टॉकिज के पास रोक लिया और एडीएम जीपी माली को ज्ञापन सौंपा.

संत-पुजारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 15 अप्रैल तक मांगों का निराकरण नहीं हुआ तो वे राजधानी में आमरण अनशन करेंगे. पांच संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देने पर महंत रामगिरि महाराज (डंडा वाले महाराज) ने कहा कि धर्म के रास्ते राजनीति में आना अच्छा है, लेकिन कूटनीति के माध्यम से आना ठीक नहीं है. इन बाबाओं को हम लोग जानते भी नहीं, ना हमसे इन्हें राज्यमंत्री का दर्जा देने से पहले पूछा गया.

गुरुवार को गुरुबख्श की तलैया स्थित श्रीराम मंदिर में विभिन्न समस्याओं को लेकर संत-पुजारियों व धार्मिक संस्थाओं की बैठक आयोजित की गई थी.

मध्यप्रदेश संत-पुजारी संघ के तत्वाधान में भोपाल में पुजारी एकत्रित हुए थे. उनकी मांग है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण का लाभ दिया जाए. मठ मंदिर समिति को अधिकार देने व कलेक्टर्स को प्रभारी के पद से हटाने की मांग के अलावा मंदिरों के पुजारी जो गरीब हैं, उन्हें निवासरत स्थान का पट्टा दिया जाए. इसके साथ ही पुजारियों का मानदेय बढ़ाया जाए, कश्मीरी पंडि़तों की वापसी तुरंत कराई जाकर उन्हं उनकी संपत्ति दिलाई जाए.

सरकार पर जमकर साधा निशाना

इस दौरान साधु संतों ने प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा, साथ ही नर्मदा यात्रा को लेकर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि हम लोगों को पूछा तक नहीं गया. यह यात्रा वीवीआईपी यात्रा थी.

संतों ने यह भी कहा कि यात्रा निकालना साधु-संतों का काम है, अन्य के यात्रा निकालने का कोई औचित्य नहीं? साधु संतों ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा निकाली जा रही नर्मदा यात्रा की प्रशंसा की और कहा कि यह बिना किसी शोर शराबे के निकाली जा रही है.

साथी संतों को भूलने वाला समाज का क्या भला करेगा

जो संत अपने साथी संतों को ही भूलकर संत समागम में नहीं आया, जो संत मठ-मंदिरों व संत-पुजारियों की समस्याओं को ही भूल गया, उसे समाज के अन्य सभी वर्गों की की समस्याएं क्या याद रहेंगी, वह क्या समाज का भला करेगा.
-भागीरथ दास बैरागी, शाजापुर

हम नाखुश हैं, घोटाला दबाने के लिए किया गया

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संतों को राज्य मंत्री बनाकर अपने पांच रत्न बनाए हैं, इससे हम खुश नहीं हैं, नर्मदा यात्रा में हुए भारी खोटाले को दबाने के लिए ऐसा किया गया है.
-चंद्रमादास त्यागी, महंत, गुफा मंदिर

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