RAJANमुंबई,  देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक की प्रमुख अरुंधती भट्टाचार्य आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन के उस बयान से इत्तेफाक नहीं रखती हैं जिसमें उन्होंने लोगों के पास नगदी के बढ़ जाने के लिए विस चुनावों को जिम्मेदार बताया था.

अरुंधती ने कहा, च्हमने इससे पहले विधानसभा चुनावों से भी बड़े चुनाव देखे हैं, लेकिन लोगों के पास नगदी की इतनी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी गई. इस बार तो ये इतनी बढ़ गई है कि इसने हमारे डिपॉजिट ग्रोथ को भी प्रभावित कर दिया है.

हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि इसका एक कारण जूलर्स की हड़ताल भी हो सकता है जिसके चलते उनकी तरफ से कैश डिपॉजिट लगभग रुका हुआ है. लेकिन अरुंधतीन का कहना है कि हड़ताल हाल ही में शुरू हुई है जबकि नगदी बढऩे की समस्या इसके काफी समय पहले की है. उन्होंने कहा कि यह अभी भी रहस्य बना हुआ है कि लोगों के पास अचानक नगदी कैसे बढ़ी.

एसबीआई की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में स्पष्ट करने की कोशिश की गई है कि नगदी बढऩे का कारण यह हो सकता है कि लोगों के बीच यह अफवाह फैली हुई है कि 500 रुपए और 1000 रुपए के नोट की वैधता को खत्म किया जा सकता है. इसके चलते ही लोग जल्द से जल्द कैश निकालकर उसे सुरक्षित संपत्ति में निवेश कर देना चाहते हों.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लोगों के बीच यह धारणा बनी हुई है कि फाइनेंशल इयर 2017 चुनावी साल रहेगा, लिहाजा लोगों ने अपने पास पहले से कैश बरकरार रखना शुरू कर दिया हो. रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा ही रुझान 2014 लोकसभा उससे पहले 2012 विधानसभा चुनावों के दौरान भी देखने को मिला था. बड़े नोटों को वापस लिए जाने की मांग कुछ लोगों द्वारा काफी लंबे समय से की जाती रही है. उनका कहना है कि बड़े नोटों का इस्तेमाल सेफ हेवन ऐसेट्स खरीदने में आसानी से हो सकता है. हालांकि उनकी इस मांग के खिलाफ यह तर्क दिया जाता है कि यह अव्यवहारिक होगा और कैश के इस्तेमाल में समस्या आएगी क्योंकि तब लोगों को बड़ी रकम के लिए बहुत ज्यादा कैश संभालना होगा. बैंकों को भी ब्रांच में इतनी बड़ी मात्रा में कैश रखने में दिक्कत होगी.

हालांकि विशेषज्ञ 5000 रुपये के नोट को लॉन्च करने के भी खिलाफ हैं. उनका मानना है कि इससे समस्या और बढ़ जाएगी और एक ही दिन में कई बार एटीएम खाली हो जाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ जाएगा.

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