अमेरिका बैंकों में आने वाली पूंजी पर अधिक ब्याज देने जा रहा है. इन अनुमानों से और दूसरी ओर चीन की मुद्रा युआन के अवमूल्यन से विश्व शेयर बाजारों में तेजी से गिरावट होने लगी है. बाजारों में विदेशी पूंजी का भारी निकास होने लगा है. बम्बई स्टाक एक्सचेंज में इस समय गत 13 महीनों के बाद सबसे बड़ी गिरावट आयी हुई है. सेनसेक्स 562.88 अंक टूटकर 25,201.90 पर आ गया. निफ्टी 168 अंक गिर गया. भारत के दिग्गज शेयर टाटा पावर, टाटा स्टील वेदान्ता हिन्डालको, एस.बी.आई. आदि 6 प्रतिशत तक गिर गये.
अंतरराष्टï्रीय मुद्राकोष (आई.एम.एफ.) ने जी 20 के वित्त मंत्रियों की बैठक में अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में निकट भविष्य में आर्थिक वृद्धि की संभावना अनुकूल है. हालांकि कुछ बृहद आर्थिक संतुलन अब भी कायम है. मुद्रा स्फीति में अनुमान से अधिक गिरावट से मौद्रिक ब्याज दर में थोड़ी कटौती के लिये गुंजाइश
पैदा की है.

भारत में रुपये में कमजोरी बढ़ गयी है. वह डालर के मुकाबले 66.50 रुपये प्रति डालर हो गया. सभी एशियाई बाजारों में तेज गिरावट का माहौल बना हुआ है. तुर्की की राजधानी अंकारा में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था वाले जी-20 के देशों की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि वे प्रतिस्पर्धा में उनकी करेन्सी की कीमत नहीं घटायेंगे. मुद्रा की कीमत को बाजारों पर छोड़ देना चाहिए. ये देश ऐसी नीतियां लायेंगे जिनसे मजबूत स्थायी और संतुलित विकास हासिल किया जा सके. पारदर्शिता बढ़ाने, अनिश्चितता दूर करने और एक देश के कदमों का असर दूसरों पर न हो. इसके लिये अपने उपाय साझा करेंगे.

यह बात उस स्दर्भ में कही गयी है कि चीन ने अपनी मुद्रा का अवमूल्यन किया है.
भारत के केन्द्रीय वित्तमंत्री श्री अरुण जेटली ने इस बैठक में यह सुझाव दिया कि अब इस बात की जरूरत हो गयी है कि वैश्विक अर्थ-व्यवस्था में देशों की मुद्रा की सुरक्षा के लिये विश्व स्तरीय नेटवर्क कायम किया जाए जिससे मुद्रा पर यदा-कदा आने वाला संकट टाला जा सके. राष्ट्रों द्वारा ऐसे अवसरों पर उनके राष्ट्र की सीमा पर जो प्रतिरोधी कदम उठाये जाते हैं वे अल्प समय तक ही कारगर रह पाते हैं. इससे वैश्विक अर्थ-व्यवस्था व मौद्रिक समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता.
ऐसे संकेत आ गये हैं कि भारत में अन्तरराष्टï्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ.) का कोटा जल्दी ही बढ़ सकता है. कई विकासशील देशों का कोटा बढ़ाया जाना है, लेकिन इसमें अमेरिका की तरफ से देरी हो रही है. लेकिन उसने यह संकेत दे दिया है कि तात्कालिक उपाय के तौर पर भारत और चीन का कोटा बढ़ाया जा सकता है. अभी भारत का कोटा मताधिकार के लिहाज से 10वें स्थान पर है. तात्कालिक व्यवस्था के तहत कोटा बढ़ाने के लिये अमेरिका संसद की मंजूरी की जरूरत नहीं होती है. भारत, बंगलादेश, भूटान और श्रीलंका के लिये ऐसी व्यवस्था हो जाने की उम्मीद है.

ऐसे अवसर पर जब भारत में रिजर्व बैंक से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह पून्जी और निवेश बढ़ाने के लिये बैंक ब्याज दरों में कमी करे रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री रघुराम राजन ने कहा है कि सतत आर्थिक वृद्धि दर्ज कर रही वैश्विक अर्थ-व्यवस्थाओं द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जरूरत है.

देशों के केन्द्रीय बैंकों को बाजारों में उतार-चढ़ाव से जुड़ी चिन्ताओं पर ब्याज दरों के बारे में फैसले नहीं लेने चाहिए. रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक समीक्षा 29 सितम्बर को होने जा रही है.