मुम्बई,

आर्थिक विकास दर के वर्ष 2018-19 में सात से 7.5 प्रतिशत के बीच रहने के सरकार के अनुमान से उत्साहित निवेशकों की लिवाली के दम पर घरेलू शेयर बाजार आज फिर नये शिखर पर पहुंच गया।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में हालांकि लक्षित विकास दर हासिल करने में कच्चे तेल की कीमतों को चिंता का मुख्य कारण बताया गया है।सर्वेक्षण में चालू वित्त वर्ष के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 6.75 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान लगाया गया है।

हालांकि, कृषि क्षेत्र के मुहाने पर अच्छी खबर नहीं है और खेती की विकास दर 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

इसमें वित्तीय घाटा, चालू खाते का घाटा और महँगाई तीनों के चालू वित्त वर्ष में उम्मीद से ज्यादा रहने की बात कही गयी है, हालाँकि यह भी कहा गया है कि “कोई डरने वाली” स्थिति नहीं है।इन तीनों मानकों पर आशंका का प्रमुख कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों को बताया गया है।

श्री जेटली ने साथ ही यह भी कहा कि वर्ष 2018-19 में भारत फिर से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन जायेगा।

आर्थिक सर्वेक्षण में पेश की गयी अर्थव्यवस्था की गुलाबी तस्वीर से निवेशकों का भरोसा शेयर बाजार में बढ़ा और बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्त गत दिवस की गिरावट से उबरता हुअा 232.81 अंक की तेजी के साथ अब तक के रिकार्ड स्तर 36,283.25 अंक पर बंद हुआ।एनएसई का निफ्टी भी 60.75 अंक की बढ़त में 11,130.40 अंक स्तर पर बंद हुआ।

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