केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने देश के आर्थिक सर्वेक्षण में विकास दर 7 से 7.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई है. यह उपलब्धि भी बताई कि नोटबंदी के प्रभाव में अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या 18 लाख बढ़ी है. लेकिन यह आशंका भी व्यक्त की गयी है कि कृषि विकास दर और उत्पादन घट सकता है.

यह तो माना गया है कि इस वर्ष जीडीपी की वृद्धि दर 6.75 प्रतिशत ही रहेगी लेकिन अगले वर्ष यह बढक़र 7 से 7.5 प्रतिशत होने की उम्मीद है.

लेकिन अंतराष्ट्रीय तेल बाजार में पेट्रो क्रूड के दामों में देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर भी पड़ सकता है. देश में पेट्रोल व डीजल के दाम इन दिनों 80 रुपये के पास तक पहुंच गये हैं और इन पर राज्य सरकारों का टैक्स भी 30 के आसपास तक पहुंच गया.

यदि इन टैक्सों को हटा दिया जाए तो पेट्रोल-डीजल 50 रुपये लीटर तक उतर सकते हैं. लेकिन पेट्रो क्रूड के बढ़ते दामों और राज्य सरकारों के बढ़ते टैक्सों से यह अंदेशा पैदा हो रहा कि इनके भाव 100 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकते हैं. इसका अर्थ यह होगा मालभाड़ा और यात्री किराया में जो उछाल आयेगा उससे देश में लगभग सभी वस्तुओं के भाव भी तेजी से बढ़ जायेंगे.

जिसका असर जहां लोगों पर व्यक्तिगत रूप से बहुत भारी हो जायेगा वहीं देश में रिटेल की मुद्रा स्फीती और भाव बढऩे से देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा. अंतराष्ट्रीय तेल बाजार में पेट्रो क्रूड के बढ़ते मूल्यों पर भारत सरकार कुछ कर नहीं सकती लेकिन उसे पेट्रोल और डीजल कोजी.एस.टी. में लाकर उनके मूल्यों में एकरुपता व कमी ला सकती है.

साथ ही जी.एस.टी. काउंसिल को पेट्रोल डीजल पर लगने वाले टैक्सों पर भी एक सीमा व सीलिंग लगानी होगी कि इन पर इससे ज्यादा टैक्स व भाव नहीं बढ़ाये जायेंगे. तभी जी.एस.टी. का मूल उद्देश्य एक राष्ट्रीय बाजार और पूरे राष्ट्र में एक से मूल्य को पाया जा सकता है.

इस आर्थिक सर्वेक्षण में एक बात खटकने वाली यह है कि इसमें भारतीय अर्थव्यवस्था की विवेचना गत 12 वर्षों के संदर्भ में की गयी है जिसमें पिछला वर्तमान व भविष्य से ज्यादा वर्णित हो गया है.

भारत का निर्यात तो पिछले वर्षों में बहुत गिर गया था उसके बारे में कहा गया है कि वर्ष 16-17 में बढ़ा है और 17-18 में और बढऩे की आशा है. लेकिन इसी समय आयात भी बढऩे के आसार हैं जो निर्यात के असर को अर्थव्यवस्था पर प्रभावित करेंगे.

सर्वे में कहा गया है कि भारत को दुनिया में उत्तम रूप से चली अर्थव्यवस्था में रखा जा सकता है. विश्व में भारत की औसत वृद्धि गत तीन वर्षों में 4 प्रतिशत रही जबकि विश्व स्तर पर यह दर तीन प्रतिशत रही.जी.डी.पी. वृद्धि का औसत 2014-15 से 2017-18 में 7.3 प्रतिशत रहा जो विश्व की अन्य अर्थव्यवस्था से सर्वाधिक है. यह उपलब्धि निम्न मुद्रास्फीति, करंट एकाउंट बेलेंस में सुधार और फिसकल डेफीशिट में कमी का परिणाम है.

अगले साल के एजेंडे में जी.एस.टी. को स्थिर करना, एयर इंडिया का निजीकरण और सूक्ष्म आर्थिक स्थिरता को बनाना है और देश में निजी क्षेत्र की भूमिका का विस्तार करना है.