बाल आयोग भी हुआ सक्रिय, 5 दिन में पोर्टल पर अपलोड होगी वाहनों की स्थिति

100 से अधिक वाहनों के चालान

नवभारत न्यूज भोपाल,

इन्दौर में हुये बस हादसे के बाद राजधानी में प्रशासन ने सख्ती दिखाई है. पुलिस और आरटीओ जहां संयुक्त अभियान चलाकर स्कूली बसों पर चालानी कार्यवाही कर रहा है, वहीं बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र शर्मा ने स्कूली बसों की जानकारी सूचना पोर्टल पर डालने के निर्देश स्कूलों को दिये हैं.

इंदौर में हुये बस हादसे के बाद उभरी जनसंवेदनाओं के ज्वार से जनप्रतिनिधि और पुलिस सख्त रवैया अपनाये हुये है. शहर में पुलिस के बनाये पांच चैङ्क्षकग पाइंट में तीन दिनों में 100 से अधिक स्कूली वाहनों पर चालानी कार्यवाही हुई है.

पहले दिन केे जांच अभियान में 13 खटारा बसों को जब्त किया गया था. जबकि 2017 में साढ़े चार सौ चालान ही स्कूल बसों के बने थे. पिछले वर्ष हुई सालाना कार्यवाही की तुलना में एक चौथाई चालानी कार्यवाही यातायात पुलिस द्वारा तीन दिनों में की गई है. ट्राफिक एएसपी महेंद्र जैन ने बताया कि हर दिन पुलिस व आरटीओ के संयुक्त अभियान में शहर की खस्ताहाल बसों को जब्त किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि स्कूल प्रबंधकों को पूर्व में ही सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन की एडवायजरी भेजी जा चुकी है, जो भी तयशुदा मापदंडों का उल्लंघन करते हुये पाया जायेगा उस पर प्रशासन कड़ा रुख अपनायेगा.
स्कूल वाहनों के रूप में धड़ल्ले से मैजिक और वैन चल रही हैं.

नियमों का मखोल उड़ाकर शहर की सड़कों पर चलती इन स्कूली वाहनों पर लगाम लगाने की आवश्यकता है. इनमें बच्चों को सामान की तरह ठूसा जाता है. स्कूली वाहनों के लिये प्रशासन ने अधिकतम 40 की स्पीड तय की है पर यह तेज गति में यातायात नियमों का मजाक उड़ाती हुई दिखती है.

बीरआरटीएस कॉरीडोर में प्रवेश कर हादसों को स्वयं निमंत्रण वाहन चालकों द्वारा दिया जाता है. इन वाहनों से सख्ती से निपटना प्रशासन की जिम्मेदारी है. बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने दो दिवसीय बसों का मुआयना कर सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के पालन के निर्देश स्कूल प्रबंधकों को दिये हैं. बुधवार को आयोग के अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र शर्मा ने शहर के सेन्ट मैरी स्कूल और सागर पब्लिक स्कूल में बसों का निरीक्षण किया.

निरीक्षण में स्कूली बसों में कई खामियां सामने आईं. सेन्ट मैरी स्कूल की बसों में जीपीएस ट्रेङ्क्षकग सिस्टम और स्पीड गवर्नर नहीं लगे थे. बसों में सीट बेल्ट व बच्चों के पकड़ कर बैठने के लिये रॉड का भी अभाव था.

उन्होंने स्कूल प्रशासन को व्यवस्थाओं को 7 दिन में ठीक करने के निर्देश दिये हैं. इसके बाद उन्होंने सागर पब्लिक स्कूल का भी निरीक्षण किया और वहां के परिवहन कक्ष में बैठकर बस की जीपीएस और लोकेशन सिस्टम देखी फिर बस में बैठकर स्पीड गवर्नर चैक किया.

पोर्टल पर डालें वाहनों की जानकारी

जिला प्रशासन ने स्कूल प्रबंधकों को अपने वाहनों की व्यवस्था को सुदृड़ करने के लिये बैठक में उचित निर्देश दिये. वहां जिला शिक्षा अधिकारी, बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य व अन्य अधिकारी सम्मिलित हुये अधिकारियों ने 7 दिन के अंदर स्कूल संचालकों को स्पीड गवर्नर, जीपीएस सरीखी प्रणाली को सही करने का समय दिया.

यहां सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का स्कूल वाहनों में कितना पालन हो रहा है इस संबंधी जानकारी जागरूक भोपाल पोर्टल पर सोमवार तक डालने के निर्देश स्कूलों को दिये गये हैं. यहां स्पीड गवर्नर लगाने वाली कंपनी पर भी प्रश्न चिन्ह उठे हैं कि बसों में स्पीड के सही मापकों का प्रयोग किया जाये.

बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन और स्कूल प्रबंधन दोनों की है. हमारी मानवीय संवेदनाएं बच्चों से जुड़ी हुई हैं. आयोग की तरफ से हमने शहर के स्कूलों का निरीक्षण कर सात दिन में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के पालन करने के निर्देश दिये हैं.
डॉ. राघवेंद्र शर्मा अध्यक्ष
बाल अधिकार संरक्षण आयोग

संस्था ने बच्चों की सुरक्षा के उचित मापदंडों के तहत निर्देश स्कूलों को दिये हैं. जिला प्रशासन के जागरूक भोपाल पोर्टल पर स्कूलों द्वारा सोमवार तक वाहनों की जानकारी अपडेट की जावेगी.
बृजेश चौहान सदस्य
बाल अधिकार संरक्षण आयोग

 

Related Posts: