राजधानी भोपाल में 70वां आलमी तब्लीगी इज्तिमा आज शनिवार 25 नवम्बर को फजीर की नमाज के साथ शुरू हो गया. सबसे बड़ा इज्तिमा बंगलादेश की राजधानी ढाका में होता है और दूसरे नंबर का बड़ा इज्तिमा भोपाल का है.

यह कुछ वर्ष पूर्व तक शहर के बीच में ताजुल मसाजिद में व उसके आसपास लगाया जाता था, लेकिन इसका रूप भी बढ़ा और राजधानी का घनत्व भी बढऩे से इसे वहां जारी रखना संभव नहीं हुआ. इसलिए अब इसे शहर के बाहरी भाग ईंटखेड़ी में लगाया जाने लगा है. यह तीन दिन चलेगा. इसे 65 एकड़ क्षेत्र में लगाया गया है.

ऐसे आयोजनों को मुसलमानों को अब उसे वक्त के अनुसार भी उसमें परिवर्तन लाने चाहिए. अभी हाल ही में मुसलमानों में ‘तीन तलाक’ की कुरीति के खिलाफ सरकार ने कठोर कदम उठाये तो उसमें भी मुसलमानों में विरोधाभास सामने आये.

दकियानूसी लोग उसकी हिदायत शरिया व इस्लाम के नाम पर करते रहे. दूसरी ओर मुल्लाओं ने यह भी माना कि मुसलमानों में ‘ट्रिपल तलाक’ का बहुत ही ज्यादा ‘मिसयूज और अब्यूज’ हुआ है. लेकिन इसको जानते व मानते हुए भी मुसलमानों ने या किसी इज्तिमा में इस ‘मिस यूज और अब्यूज’ पर कभी कुछ नहीं कहा. मुसलमानों को यह नसीहत नहीं दी गई कि यह बहुत गलत है.

भोपाल में एक सिमी देशद्रोही पकड़ा गया उसने अपने बयान में कहा कि ‘जमातों की तकरीरें सुनने के बाद कौन हिन्दुस्तान से मोहब्बत कर सकता है?

इज्तिमा में अधिकांश लोग जमातों के ही होते हैं. इज्तिमा में सिमी के आतंकी के बयान से यह देखा जाना चाहिए कि जमातों में किस तरह की तकरीरें व काम हो रहे हैं. क्या उनके संबंध ऐसे लोगों से हैं जो इस देश के खिलाफ हैं?