सन् 2017 अब विदाई की बेला में है. कुछ यादें सुखद बनकर इतिहास में दर्ज हो गईं, तो कुछ मानवता को शर्मसार कर गईं, जिन्हें लोग याद भी नहीं रखना चाहते.

इन्दौर व भोपाल स्वच्छता में अव्वल: 2017 में पहली बार ऐसा हुआ कि सवा सौ करोड़ की आबादी वाले हमारे देश में स्वच्छता के पायदान पर मध्यप्रदेश को नवाजा गया. स्वच्छता सर्वे के बाद जो घोषणा हुई, वह अप्रत्याशित थी. इसमें इन्दौर प्रथम व भोपाल दूसरे स्थान पर रहा.

2016 में अव्वल रहने वाला मौसूर शहर पिछड़ कर 11वें नंबर पर चला गया. यह उपलब्धि दशकों तक लोगों को याद रहेगी. उत्साहित राजधानी के महापौर आलोक शर्मा अब शहर को प्रथम पायदान पर लाने का प्रयास कर रहे हैं.

पहली बार 2 बजे रात तक अदालत: लोगों को 23 नवंबर की वह रात भी कभी नहीं भूलेगी, जब प्रदेश के न्यायिक इतिहास में नया अध्याय जुड़ गया. व्यापमं घोटाले में हो रही सुनवाई के लिये विशेष न्यायाधीश ने लगातार रात दो बजे तक सुनवाई की एवं रात दो बजकर 10 मिनट पर अपना निर्णय सुनाते हुये उन रसूखदारों की जमानत याचिका निरस्त कर दी, जिन्हें अपनी ऊंची पहुंच का बड़ा गुमान था.

उदयन दास का अपराध

भोपाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गये साकेत नगर निवासी उदयन दास का मामला अंतर्राज्यीय था. मासूम-से दिखने वाले इस आरोपी ने पहले पत्नी की हत्या कबूली फिर माता-पिता की हत्या का राज उजागर कर दिया.

वह एक और हत्या करना चाहता था, कि इससे पहले पुलिस के चंगुल में आ गया. यह एक ऐसी मिस्ट्री रही, जिसे जानकर पूरा मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ सिहर गया. पुलिस भी हैरान रह गई कि मासूम चेहरे के पीछे कितना बड़ा शैतान छिपा हुआ है.

प्याज व राशन घोटाला

सन् 2017 में दो ऐसे घोटाले सामने आये जिनकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी. प्याज की बंपर फसल जब बेमोल सड़क पर फेंकी जाने लगी तो शासन ने 8 रुपये प्रति कलो की दर से प्याज खरीदी. बाद में 2 रुपये की दर से बेची. इस दौरान छह सौ टन प्याज गायब हो गई. प्रदेशव्यापी इस घोटाले की जांच सिर्फ भोपाल तक सीमित रखी गई एवं छह माह बाद भी गायब प्याज को खोजा जा रहा है.

इसी तरह से अनाज घोटाला हुआ, जिसमें संस्थाओं व मदरसों को मिलने वाला सस्ता गेहूं मंडी के गोदामों से पकड़ा गया. इस मामले में प्राथमिकी तो हुई, लेकिन गिरफ्तारी न हो सकी. घोटाला करने वाले व्यापारी व अधिकारी आज भी अपना कारोबार कर रहे हैं.

भोपाल गैंगरेप

अक्टूबर 2017 के अंतिम दिन जो हुआ उसने पूरे प्रदेश को दहला दिया. घटना हबीबगज भोपाल की थी, लेकिन इसकी गूंज विधानसभा तक पहुंची. 31 अक्टूबर की रात आईएएस कोङ्क्षचग कर रही छात्रा को चार शैतानों ने हवस का शिकार बनाया. पुलिस ने इस मामले में दो दिन बाद जांच शुरू की, जब बात मीडिया में आ गई.

इसके बावजूद राहत यह रही कि निकम्मे पुलिस अधिकारियों को पद गंवाना पड़ा जबकि 52 दिनों तक लगातार सुनवाई कर विशेष न्यायालय ने अपना निर्णय सुना दिया. इस घटना का असर इतना व्यापक रहा कि प्रदेश सरकार को नया कानून बनाना पड़ा, जिसमें बलात्कारियों के लिये फांसी की सजा का प्रावधान है.

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