sushil kumar shindeyनई दिल्ली, 4 जुलाई. इशरत जहां मामले पर केन्द्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिन्दे ने कहा कि कथित फर्जी मुठभेड को अंजाम देने के दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए.

अहमदाबाद की अदालत में केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने कल कहा था कि 19 वर्षीय इशरत जहां 2004 में एक फर्जी मुठभेड में मारी गयी . सीबीआई ने मामले में सात पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किये हैं . उसका कहना है कि यह गुजरात पुलिस और सहायक खुफिया ब्यूरो की संयुक्त कार्रवाई थी।
शिन्दे से जब इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि तथ्य तो तथ्य हैं। दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए.

गृह मंत्री का बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि गृह मंत्रालय के अधिकारी कहते आये हैं कि कथित फर्जी मुठभेड मामले में खुफिया ब्यूरो के विशेष निदेशक राजेन्दर कुमार और तीन अन्य के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुमार के खिलाफ मुकदमा करने के लिए गृह मंत्रालय संभवत:सीबीआई को अनुमति नहीं दें हालांकि सीबीआई ने मंत्रालय से ऐसी कोई मंजूरी नहीं मांगी है. उल्लेखनीय है कि गृह मंत्रालय ही आईपीएस अधिकारियों का कैडर नियंत्रण करता है ।

इशरत को हिरासत में रखा था

अहमदाबाद. इशरत जहां मामले में सीबीआई की ओर से दाखिल आरोपपत्र में दावा किया गया है कि फर्जी मुठभेड़ में मारे जाने के पहले कालेज छात्रा इशरत जहां और तीन अन्य को गुजरात पुलिस की हिरासत में रखा गया था। मुख्य जांच अधिकारी सीबीआई उपाधीक्षक जी कलैमणि ने बुधवार को पहला आरोपपत्र दाखिल किया. उन्होंने कहा कि इशरत के साथ मारा गया कथित पाकिस्तानी नागरिक जीशान जोहर करीब तीन महीने तक गुजरात पुलिस की अवैध हिरासत में था।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और सीबीआई न्यायाधीश एचएस खुतवाड के समक्ष दाखिल आरोपपत्र में कहा गया है कि जीशान जोहर को गुजरात सब्सिडियरी आईबी के तत्कालीन प्रमुख राजेंद्र कुमार के दो मुखबिरों की मदद से अप्रैल 2004 में अहमदाबाद लाया गया था.

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