kasuriनई दिल्ली,  पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों के बीच शिखर वार्ता बिना ”उचित तैयारियों” के नहीं होनी चाहिए और उफा के बाद आए गतिरोध को भंग करने का एकमात्र रास्ता पर्दे के पीछे की कूटनीति होनी चाहिए। कसूरी ने कहा कि जिस तरह दोनों देश 2004 और 2007 के बीच खुफिया वार्ता कर कश्मीर मुद्दा हल करने के लिए किसी फार्मूले तक करीब करीब पहुंच चुके थे, उसी तरह उन्हें खुफिया वार्ता संचालित करनी चाहिए।

पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों को अपने तल्ख रिश्तों में सुधार के लिए परस्पर ”वैमनस्य” दूर करना चाहिए और दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को एक दूसरे के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणी करने वाले अपने अपने सत्ता प्रतिष्ठानों के लोगों को सख्ती से रोकना चाहिए। भारत में अपनी किताब ”नाइदर एक हॉक नॉर ए डव” जारी होने के कई दिन बाद कसूरी ने दावा किया कि तकरीबन आठ साल पहले पर्दे के पीछे की कूटनीति से कश्मीर के स्थाई हल का रास्ता लगभग निकल चुका था। इस हल को पाकिस्तानी सेना और आईएसआई का अनुमोदन था। पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि अभी वक्त का तकाजा है कि दोनों पक्ष आगे बढ़ें और इसे हल करें।

र्ष 2002 से 2007 तक पाकिस्तान के विदेश मंत्री रहे कसूरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पिछले साल अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को दावत देने और उफा में बैठक की ख्वाहिश जाहिर करने के कदम को कश्मीर मुद्दे से निबटने के सिलसिले में एक सकारात्मक संकेत बताया। कसूरी ने कहा, ”बिना उचित तैयारियों के उच्च स्तरीय बैठकें, शिखर स्तरीय बैठकें नहीं होनी चाहिए। उफा के लिए कोई ‘होमवर्क’ नहीं हुआ था। मैं बिना किसी गंभीर वार्ता के कैमरे के सामने हाथ मिलाने, मुस्कराने, यहां तक कि एक प्याला चाय भी लेने के पक्ष में हूं।”

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